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India Daily

'रिटायरमेंट सिर्फ उम्र का पड़ाव है...', देहरादून के दो पूर्व सैन्य अफसरों ने लद्दाख की पहाड़ियों में बाइक दौड़ाकर रचा इतिहास

देहरादून के दो पूर्व सैनिकों कर्नल आरएस सिद्धू और कैप्टन एनएस बिष्ट ने लद्दाख के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में बाइक यात्रा पूरी कर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया.

Ashutosh
Edited By: Ashutosh Rai
'रिटायरमेंट सिर्फ उम्र का पड़ाव है...', देहरादून के दो पूर्व सैन्य अफसरों ने लद्दाख की पहाड़ियों में बाइक दौड़ाकर रचा इतिहास
Courtesy: X

सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी जुनून और हौसला कम नहीं हुआ. देहरादून के दो पूर्व सैन्य अधिकारियों ने लद्दाख की कठिन पहाड़ियों में मोटरसाइकिल यात्रा पूरी कर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया. इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि उम्र और रिटायरमेंट किसी भी बड़े लक्ष्य की राह में रुकावट नहीं बनते.

लद्दाख की कठिन राहों पर शानदार उपलब्धि

स्काई राइडर्स टीम के सदस्य कर्नल आरएस सिद्धू और कैप्टन एनएस बिष्ट ने 10 दिनों की चुनौतीपूर्ण मोटरसाइकिल यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा किया. यात्रा की शुरुआत देहरादून से हुई और टीम ने मामून, श्रीनगर, लेह, पाटसियो और जिरकपुर होते हुए वापसी की. इस पूरे अभियान के दौरान करीब 3100 किलोमीटर की दूरी तय की गई. खास बात यह रही कि लगभग 1400 किलोमीटर का सफर लद्दाख के ऊंचाई वाले और बेहद कठिन क्षेत्रों में पूरा किया गया. दोनों अधिकारियों ने पांच हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले कई पर्वतीय दर्रों को पार कर राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम किया.

चुनौतियों के बीच नहीं टूटा हौसला

लद्दाख की यात्रा आसान नहीं थी। कम ऑक्सीजन, खराब सड़कें, तेज हवाएं और पल-पल बदलता मौसम लगातार चुनौती बनकर सामने आए. कई स्थानों पर रास्ते बेहद संकरे और जोखिम भरे थे. इसके बावजूद दोनों पूर्व सैनिकों ने अपने अनुभव और अनुशासन के दम पर हर चुनौती का सामना किया. सेना में बिताए वर्षों का अनुभव इस अभियान में उनके बहुत काम आया. कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने धैर्य बनाए रखा और पूरे अभियान को सुरक्षित तरीके से पूरा किया. यह यात्रा केवल एक रिकॉर्ड नहीं बल्कि साहस की मिसाल बन गई.

युवाओं के लिए प्रेरणा बना अभियान

यह पूरी यात्रा ‘शक्ति से सामर्थ्य’ थीम पर आधारित थी. इसका उद्देश्य समाज को यह संदेश देना था कि सेवानिवृत्ति के बाद भी सैनिकों का जज्बा कम नहीं होता. कर्नल सिद्धू और कैप्टन बिष्ट ने कहा कि सेना का प्रशिक्षण व्यक्ति को हर परिस्थिति में आगे बढ़ना सिखाता है. उन्होंने अपनी उपलब्धि देश के सैनिकों और पूर्व सैनिक समुदाय को समर्पित की. दोनों का मानना है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती.