menu-icon
India Daily

मानसून में कॉर्बेट बना अभेद्य किला, वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए चौकसी दोगुनी

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में मानसून शुरू होते ही सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है.  वन विभाग रोजाना 600 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में गश्त कर रहा है. ड्रोन और आधुनिक तकनीक से भी जंगल की निगरानी की जा रही है. 

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
मानसून में कॉर्बेट बना अभेद्य किला, वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए चौकसी दोगुनी
Courtesy: @gaurravbhrdwj

देश के सबसे चर्चित वन्यजीव अभयारण्यों में शामिल कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में बारिश का मौसम शुरू होते ही सुरक्षा तैयारियां तेज कर दी गई हैं. जंगल के भीतर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है. वन विभाग का उद्देश्य मानसून के दौरान वन्यजीवों को सुरक्षित रखना और किसी भी अवैध गतिविधि को समय रहते रोकना है. इसके लिए जमीनी गश्त के साथ आधुनिक तकनीकों का भी सहारा लिया जा रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र पर लगातार नजर रखी जा सके. 

मानसून गश्त पर विशेष जोर

कॉर्बेट प्रशासन ने छह वन रेंजों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया है. वनकर्मी प्रतिदिन 600 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में गश्त कर रहे हैं. बारिश के दौरान कई रास्ते क्षतिग्रस्त हो जाते हैं और कुछ चौकियों का संपर्क भी प्रभावित होता है. ऐसे समय में नियमित पेट्रोलिंग बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है. विभाग का मानना है कि लगातार निगरानी से जंगल में किसी भी संदिग्ध गतिविधि को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता है और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है. 

 शिकार रोकने पर पूरा फोकस

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला के अनुसार मानसून अभियान का मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों को किसी भी खतरे से बचाना है. बारिश के मौसम में जंगल के कई हिस्सों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो जाता है, इसलिए गश्त को और अधिक प्रभावी बनाया गया है. वन विभाग विशेष रूप से इस बात पर नजर रख रहा है कि कहीं भी शिकार या अन्य अवैध गतिविधियों की घटनाएं न हों. इसके लिए फील्ड स्टाफ को भी अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं. 

तकनीक से हो रही निगरानी

जंगल की सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए ड्रोन कैमरों का उपयोग किया जा रहा है. इसके अलावा सैटेलाइट आधारित निगरानी प्रणाली और आधुनिक संचार नेटवर्क की मदद से संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर रखी जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि तकनीक के इस्तेमाल से दूरदराज के इलाकों की गतिविधियों की जानकारी भी तेजी से मिल रही है. इससे सुरक्षा तंत्र पहले की तुलना में अधिक सक्रिय और प्रभावी बना है. 

 संरक्षण अभियान को मिली गति

मानसून के दौरान पर्यटन गतिविधियां सीमित होने के बाद विभाग का पूरा ध्यान वन्यजीव संरक्षण पर केंद्रित हो गया है. जंगल के भीतर सुरक्षा, निगरानी और संरक्षण से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है. वन अधिकारी मानते हैं कि यह समय प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा के लिए बेहद अहम होता है. इसी कारण चौकसी बढ़ाकर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कॉर्बेट का जैविक संतुलन सुरक्षित रहे और वन्यजीव बिना किसी खतरे के अपने प्राकृतिक वातावरण में रह सकें.