विवादों का होगा सौहार्दपूर्ण समाधान! विशेष लोक अदालत के लिए उत्तराखंड ने कसी कमर
उत्तराखंड सरकार ने अगस्त 2026 में होने वाली सर्वोच्च न्यायालय की विशेष लोक अदालत की तैयारियां तेज कर दी हैं. राज्य से चिन्हित 199 मामलों के त्वरित और सौहार्दपूर्ण निस्तारण के लिए विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं.
देहरादून: राजधानी देहरादून में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में आगामी विशेष लोक अदालत की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई. यह विशेष आयोजन अगस्त 2026 में सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली में होगा. बैठक में विभिन्न विभागों से जुड़े लंबित मामलों की स्थिति, उनके संभावित समाधान और विभागों के बीच समन्वय को लेकर रणनीति बनाई गई. राज्य सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक मामलों का आपसी सहमति और संवाद के माध्यम से निस्तारण सुनिश्चित करना है.
विशेष लोक अदालत की तैयारियों पर जोर
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को चिन्हित मामलों की गंभीरता से समीक्षा करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि जिन मामलों में समझौते की संभावना है, वहां प्राथमिकता के आधार पर पहल की जानी चाहिए. इससे लंबित विवादों को कम समय में सुलझाने में मदद मिलेगी और पक्षकारों को शीघ्र राहत मिल सकेगी.
199 मामलों को किया गया चिन्हित
अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि उत्तराखंड से कुल 199 मामलों को विशेष लोक अदालत के लिए चिन्हित किया गया है. इन मामलों में विभिन्न विभागों से जुड़े विवाद शामिल हैं. राज्य सरकार इन मामलों का व्यवस्थित विश्लेषण कर रही है ताकि समाधान की संभावनाओं को मजबूत किया जा सके और न्यायिक प्रक्रिया को गति मिले.
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विविध श्रेणियों के मामले होंगे शामिल
विशेष लोक अदालत में दीवानी और फौजदारी मामलों के अलावा बैंकिंग, उपभोक्ता विवाद, पारिवारिक विवाद, भूमि अधिग्रहण, मुआवजा, सेवा संबंधी प्रकरण और अन्य कानूनी मामलों को भी शामिल किया गया है. सरकार का मानना है कि एक मंच पर विभिन्न श्रेणियों के मामलों के समाधान से न्यायिक बोझ कम करने में सहायता मिलेगी.
संवाद और समन्वय पर विशेष फोकस
मुख्य सचिव ने विभागीय नोडल अधिकारियों को संबंधित पक्षों से प्रभावी संवाद स्थापित करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए सक्रिय प्रयास जरूरी हैं. विभागों को नियमित रूप से प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने और जिला तथा राज्य स्तर पर बेहतर समन्वय बनाए रखने के लिए भी कहा गया.
समयबद्ध निस्तारण का लक्ष्य
सरकार का प्रयास है कि विशेष लोक अदालत के दौरान अधिकतम मामलों का समाधान हो सके. इसके लिए सभी विभागों को समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं. अधिकारियों का मानना है कि आपसी सहमति से विवादों का समाधान होने पर लोगों का समय और संसाधन दोनों बचेंगे तथा न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सकेगी.