उत्तराखंड में मानसून को लेकर हाई अलर्ट, CM धामी ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

उत्तराखंड सरकार ने मानसून के दौरान बांधों और बैराजों की निगरानी मजबूत करने के निर्देश दिए हैं. पानी छोड़ने से पहले सूचना देना, रियल टाइम डेटा साझा करना और चेतावनी प्रणाली को प्रभावी बनाना अनिवार्य किया गया है.

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Kanhaiya Kumar Jha

देहरादून: उत्तराखंड में मानसून के बीच संभावित आपदाओं से निपटने के लिए सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की. बैठक में जल विद्युत परियोजनाओं और संबंधित विभागों को बेहतर समन्वय, समय पर सूचना साझा करने और आधुनिक निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए गए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके.

बैठक में निर्देश दिए गए कि किसी भी बांध या बैराज से पानी छोड़े जाने से पहले राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र और संबंधित जिला प्रशासन को अनिवार्य रूप से सूचना दी जाए. साथ ही यह भी बताया जाए कि पानी किन क्षेत्रों तक कब पहुंचेगा, जलस्तर कितना बढ़ सकता है और संभावित प्रभाव क्या होंगे. इससे समय रहते लोगों को सतर्क किया जा सकेगा.

रियल टाइम डेटा साझा करने के निर्देश

सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि नदी जलस्तर सेंसर और डिस्चार्ज मॉनिटरिंग सिस्टम से मिलने वाले आंकड़े एपीआई के माध्यम से रियल टाइम में यूएसडीएमए के साथ साझा किए जाएं. इससे मौसम और जलस्तर की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सकेगी तथा निर्णय लेने में तेजी आएगी.


चेतावनी प्रणाली का होगा विस्तार

बैठक में सभी जल विद्युत परियोजनाओं को ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन और अर्ली वार्निंग सिस्टम का दायरा बढ़ाने के निर्देश दिए गए. विशेष रूप से टिहरी हाइड्रो पावर कॉरपोरेशन को अपने क्षेत्र में ऑटोमैटिक वेदर स्टेशनों की संख्या बढ़ाकर 25 करने को कहा गया, ताकि मौसम संबंधी जानकारी अधिक सटीक मिल सके.

बांधों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर

सचिव ने कहा कि एक ही नदी तंत्र में स्थित अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम बांधों के बीच नियमित सूचना साझा करना जरूरी है. जलस्तर, वर्षा और डिस्चार्ज से जुड़ी जानकारी लगातार साझा करने से किसी भी आपात स्थिति में समन्वित और प्रभावी कार्रवाई करना आसान होगा.

मशीनरी और उपकरण पहले से रहें तैयार

बैठक में अधिकारियों ने चेतावनी सायरन, सेंसर और अन्य तकनीकी उपकरणों की नियमित जांच के निर्देश दिए. साथ ही बाढ़ संभावित क्षेत्रों में मशीनरी और आवश्यक संसाधनों की अग्रिम तैनाती सुनिश्चित करने को कहा गया. जल निकासी व्यवस्था मजबूत रखने और भारी बारिश के दौरान जलभराव रोकने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों को पहले से तैयार रहने के निर्देश भी दिए गए.