नई दिल्ली: पिथौरागढ़ के मच्छीखेत गांव के नीरज सिंह के लिए साल 2020 खुशियों की जगह अंधेरा लेकर आया. इंटर की पढ़ाई पूरी कर सुनहरे भविष्य के सपने बुन रहा यह युवक अचानक एक कत्ल के इल्जाम में अपराधी करार दे दिया गया. पुलिस की चार्जशीट और निचली अदालत के उम्रकैद के फैसले ने उसकी जवानी के कीमती छह साल छीन लिए. आखिरकार नैनीताल हाईकोर्ट ने ठोस सबूतों की कमी और गवाहों के बयानों में विरोधाभास देख उसे बाइज्जत रिहा करने का आदेश दिया.
नीरज के बड़े भाई गोकुल के अनुसार, वह पढ़ाई में बहुत ही मेधावी था और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटा था. 19 सितंबर 2020 की उस मनहूस रात ने उसकी दुनिया ही उजाड़ दी जब उस पर पुरानी रंजिश में गोली मारने का संगीन आरोप लगा. जो वक्त किताबों के साथ गुजरना चाहिए था, वह पुलिसिया पूछताछ और जेल की अंधेरी कोठरियों में बीता. व्यवस्था की इस भारी चूक ने एक काबिल युवा का भविष्य अंधकारमय बना दिया.
गांव के लोगों ने परिवार का कर दिया 'सामाजिक बहिष्कार'
नीरज पर लगे हत्या के इल्जाम ने न केवल उसे जेल की सलाखों के पीछे धकेला, बल्कि उसके पूरे परिवार को समाज की नजरों में गुनहगार बना दिया. समाज के बढ़ते दबाव और ग्रामीणों के तानों के कारण परिवार को अपना पुश्तैनी मकान तक छोड़ना पड़ गया. वे अपना सब कुछ त्यागकर गांव की सीमा पर बसने को विवश हो गए.
न्यायमूर्ति रविंद्र मैथाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने इस केस की गहराई से समीक्षा की. अदालत ने स्पष्ट पाया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई पुख्ता प्रमाण नहीं था जो नीरज के दोष को सिद्ध कर सके. बचाव पक्ष के न्यायमित्र वकील डीसीएस रावत ने तर्क दिया कि युवक को केवल शक के आधार पर गलत फंसाया गया था. हाईकोर्ट ने माना कि बिना पर्याप्त साक्ष्य किसी की व्यक्तिगत आजादी छीनना न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है.
पुलिस द्वारा तैयार की गई चार्जशीट शुरू से ही संदेह के घेरे में रही थी. एफआईआर के शुरुआती तथ्यों और बाद में गवाहों द्वारा दिए गए बयानों में भारी विसंगतियां पाई गईं. घटनास्थल के नक्शे और मुख्य गवाह सरस्वती देवी के दावों में भी तालमेल की भारी कमी दिखी. अदालत ने इन विरोधाभासों को आधार बनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष अपना मामला संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह से विफल रहा है.
कानूनी रूप से नीरज अब आजाद है, लेकिन उसके जीवन के जो छह साल जेल की भेंट चढ़ गए, उनकी भरपाई नामुमकिन है. आज वह युवक फिर से उसी मोड़ पर खड़ा है जहां उसका करियर और उम्मीदें खत्म हो चुकी हैं. परिवार आज भी उस असल गुनहगार की तलाश में है जो अब भी कानून की पकड़ से बाहर है.