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कैंची धाम मार्ग पर जाम से परेशान? ट्रैकिंग रूट से पहुंचिए बाबा के दरबार, रास्ते में मिलेगा प्रकृति का अद्भुत नजारा

कैंची धाम का स्थापना दिवस महोत्सव 15 जून को मनाया जा रहा है. कैंची धाम पहुंचने के लिए एक ऐसा रास्ता भी मौजूद है जो न केवल ट्रैफिक जाम से बचाता है, बल्कि यात्रियों को प्राकृतिक सौंदर्य के बेहद करीब ले जाता है.

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Edited By: Shanu Sharma
कैंची धाम मार्ग पर जाम से परेशान? ट्रैकिंग रूट से पहुंचिए बाबा के दरबार, रास्ते में मिलेगा प्रकृति का अद्भुत नजारा
Courtesy: Pinterest

विश्व प्रसिद्ध बाबा नीम करौली महाराज के कैंची धाम का स्थापना दिवस महोत्सव 15 जून को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा. हर वर्ष इस अवसर पर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए कैंची धाम पहुंचते हैं. श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के चलते नैनीताल-कैंची धाम मार्ग पर अक्सर लंबा जाम लग जाता है और यातायात डायवर्जन की स्थिति बनती है. ऐसे में यात्रियों को घंटों तक परेशानियों का सामना करना पड़ता है. हालांकि इस बार श्रद्धालुओं और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक राहत भरा विकल्प उपलब्ध है.

कैंची धाम पहुंचने के लिए एक ऐसा रास्ता भी मौजूद है जो न केवल ट्रैफिक जाम से बचाता है, बल्कि यात्रियों को प्राकृतिक सौंदर्य के बेहद करीब ले जाता है. नैनीताल से कैंची धाम तक जाने वाले ब्रिटिशकालीन पैदल मार्ग को पर्यटन विभाग ने फिर से विकसित किया है. इस पुराने रास्ते का सौंदर्यीकरण और मरम्मत कर इसे आकर्षक ट्रैकिंग रूट के रूप में तैयार किया गया है.

नैनीताल से शुरू होती है यात्रा

यह ट्रैक नैनीताल की शेर का डांडा पहाड़ी स्थित बिरला चुंगी से शुरू होकर चोरसा और भवाली गांवों से गुजरते हुए सीधे कैंची धाम तक पहुंचता है. अंग्रेजों के शासनकाल में बनाए गए इस पैदल मार्ग का उपयोग कभी स्थानीय लोग आवाजाही के लिए करते थे. समय के साथ इसका इस्तेमाल कम हो गया, लेकिन अब इसे नए स्वरूप में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए फिर से खोला गया है. चीड़ और देवदार के घने जंगलों से होकर गुजरने वाला यह ट्रैक प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है. रास्ते में पक्षियों की मधुर चहचहाहट, शांत पहाड़ी वातावरण और छोटी-छोटी जलधाराएं यात्रियों को अलग ही अनुभव प्रदान करती हैं. यह मार्ग उन लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन सकता है जो धार्मिक यात्रा के साथ प्रकृति का आनंद भी लेना चाहते हैं.

यात्रियों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम

जिला पर्यटन अधिकारी अतुल भंडारी के अनुसार ट्रैकिंग रूट पर यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई व्यवस्थाएं की गई हैं. पूरे मार्ग पर दिशा-सूचक बोर्ड लगाए गए हैं ताकि किसी को रास्ता खोजने में परेशानी न हो. इसके अलावा विश्राम स्थल, पेयजल सुविधा और मार्ग के सौंदर्यीकरण का कार्य भी किया गया है. पर्यटन विभाग का मानना है कि भविष्य में इस मार्ग पर और अधिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी. इससे यह धार्मिक पर्यटन और साहसिक पर्यटन का एक उत्कृष्ट मॉडल बन सकेगा. साथ ही ट्रैक से जुड़े गांवों के लोगों को भी रोजगार के नए अवसर मिलेंगे.