जंतर-मंतर पर भाषण पड़ा भारी! बागी सिपाही शेर सिंह को पुलिस सेवा से किया बर्खास्त
जंतर मंतर प्रदर्शन में मंच से भाषण देने के बाद चर्चा में आए उत्तराखंड पुलिस के सिपाही शेर सिंह को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है. विभाग ने अनुशासनहीनता और गंभीर कदाचार को कार्यवाही का आधार बताया है.
जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान मंच से भाषण देकर सुर्खियों में आए उत्तराखंड पुलिस के सिपाही शेर सिंह के खिलाफ विभाग ने बड़ी कार्यवाही की है. पिथौरागढ़ पुलिस ने उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया है. विभाग का कहना है कि शेर सिंह ने पुलिस सेवा के अनुशासन, सत्यनिष्ठा और आचरण से जुड़े नियमों का गंभीर उल्लंघन किया. वहीं शेर सिंह ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उन्होंने पहले ही इस्तीफा दे दिया था और उन्हें अपनी बात रखने से रोका गया.
विभाग ने क्यों की बर्खास्तगी
पिथौरागढ़ पुलिस के अनुसार विभागीय जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह फैसला लिया गया. पुलिस का कहना है कि शेर सिंह का आचरण सेवा नियमों के अनुरूप नहीं था. विभाग ने स्पष्ट किया कि अनुशासन और ईमानदारी से जुड़े मानकों से समझौता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता. इसी कारण उन्हें पुलिस सेवा से हटाने का आदेश जारी किया गया.
जंतर मंतर का भाषण बना चर्चा का विषय
जंतर मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान शेर सिंह मंच पर पहुंचे और अभिजीत दिपके के समर्थन में भाषण दिया. इस दौरान उन्होंने खुद को बागी बताते हुए पुलिस बैज उतारने की बात कही और नौकरी छोड़ने का ऐलान भी किया. उन्होंने मंच से अपना इस्तीफा पत्र भी दिखाया. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था.
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शेर सिंह ने दी अपनी सफाई
कार्रवाई के बाद शेर सिंह ने वीडियो संदेश जारी कर विभाग के आरोपों का विरोध किया. उनका कहना था कि उन्होंने पहले ही इस्तीफा सौंप दिया था, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें समाज के मुद्दों पर आवाज उठाने से रोका गया. साथ ही दावा किया कि उन्होंने विभिन्न गांवों में 85 से अधिक भीम पाठशालाएं शुरू की हैं.
पहले से चल रही थी विभागीय कार्यवाही
उत्तराखंड पुलिस ने बताया कि शेर सिंह पहले से निलंबित थे और उनके खिलाफ विभागीय जांच जारी थी. पुलिस के अनुसार वर्ष 2025 में दर्ज एक मामले में उन पर धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश सहित कई धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था. गिरफ्तारी के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था और जांच आगे बढ़ाई गई.
गंभीर आरोपों का भी है मामला
पुलिस का आरोप है कि जांच के दौरान शेर सिंह का नाम हरिद्वार रुड़की क्षेत्र के एक कथित आपराधिक गिरोह से जुड़ा मिला. उन पर अन्य आरोपियों के साथ मिलकर लोगों को डराने, जमीन पर अवैध कब्जा कराने और आर्थिक लाभ पहुंचाने में सहयोग करने के आरोप हैं. हालांकि इन आरोपों पर शेर सिंह ने अपनी अलग सफाई पेश की है. मामले से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है.