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उत्तराखंड की धामी सरकार ने बदले दो सड़कों के नाम, इतिहास और राज्य आंदोलन को मिला सम्मान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रानीखेत क्षेत्र की दो सड़कों का नाम बदलने को मंजूरी दी है. एक सड़क साहिबजादा फतेह सिंह और दूसरी राज्य आंदोलनकारी स्वर्गीय पूरन सिंह डंगवाल के नाम पर होगी.

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Kanhaiya Kumar Jha

देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने इतिहास और राज्य के गौरव से जुडे दो महत्वपूर्ण नामों को सम्मान देने की दिशा में अहम कदम उठाया है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अल्मोड़ा जिले के रानीखेत विधानसभा क्षेत्र की दो सड़कों के नाम बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. सरकार के इस फैसले को सांस्कृतिक विरासत और राज्य आंदोलन के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की पहल के रूप में देखा जा रहा है. स्थानीय स्तर पर भी इस निर्णय का स्वागत किया जा रहा है.

सरकार के आदेश के अनुसार बिडोरा छेवी पातशाही गेट से धूमखेडा तक जाने वाली सड़क का नाम अब साहिबजादा फतेह सिंह रोड रखा जाएगा. साहिबजादा फतेह सिंह सिख इतिहास के उन महान बाल वीरों में गिने जाते हैं, जिन्होंने कम उम्र में भी अपने सिद्धांतों और आस्था से समझौता नहीं किया. उनका बलिदान भारतीय इतिहास में साहस, त्याग और अटूट विश्वास का प्रतीक माना जाता है. सरकार का मानना है कि इस नामकरण से आने वाली पीढ़ियों को उनके जीवन और संघर्ष से प्रेरणा मिलेगी.

राज्य आंदोलनकारी पूरन सिंह डंगवाल को भी मिला सम्मान

दूसरे फैसले के तहत सौनी, दौडाखाल और टिपोला को जोडने वाली मोटर रोड का नाम राज्य आंदोलनकारी स्वर्गीय पूरन सिंह डंगवाल के नाम पर रखा जाएगा. उत्तराखंड राज्य के गठन के आंदोलन में उनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है. उन्होंने अलग राज्य की मांग को लेकर लंबे समय तक जनजागरण और सामाजिक भागीदारी के माध्यम से सक्रिय भूमिका निभाई थी. उनके सम्मान में सड़क का नामकरण राज्य आंदोलन के इतिहास को याद रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.


सरकार ने बताया सम्मान और प्रेरणा का प्रयास

राज्य सरकार का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों का नाम उन लोगों के नाम पर रखा जाना चाहिए, जिन्होंने समाज, संस्कृति और राष्ट्र के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया हो. इससे न केवल उनके कार्यों को स्थायी पहचान मिलती है, बल्कि युवाओं को भी अपने इतिहास और विरासत के बारे में जानने का अवसर मिलता है. सरकार का मानना है कि ऐसे फैसले समाज में सकारात्मक संदेश देने के साथ साथ ऐतिहासिक चेतना को भी मजबूत करते हैं.