एक बटन दबाते ही पैराशूट खुलेगा और होगी सेफ लैंडिंग, रवि टम्टा ने बताया नया प्रोजेक्ट
उत्तराखंड के नवाचारी रवि टम्टा ने इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेकऑफ एंड लैंडिंग यानी eVTOL वाहन का सफल प्रोटोटाइप परीक्षण किया है. अब उनका लक्ष्य ऐसा इलेक्ट्रिक eVTOL तैयार करना है जो लगातार पांच घंटे तक उड़ सके.
उत्तराखंड के नवाचारी रवि टम्टा एक बार फिर अपने नए प्रयोग को लेकर चर्चा में हैं. इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेकऑफ एंड लैंडिंग यानी eVTOL वाहन के प्रोटोटाइप का सफल परीक्षण करने के बाद अब उन्होंने अपने अगले प्रोजेक्ट की जानकारी साझा की है. उनका लक्ष्य ऐसा विद्युत चालित eVTOL तैयार करना है, जो लगातार करीब पांच घंटे तक हवा में उड़ सके. इस नए प्रोजेक्ट को सिर्फ परिवहन के लिए ही नहीं, बल्कि आपदा के समय भी उपयोगी बनाने की तैयारी की जा रही है. इसमें सुरक्षा के लिए पैराशूट सिस्टम भी लगाया जाएगा.
क्या है eVTOL और कैसे करता है काम?
eVTOL का पूरा नाम Electric Vertical Take Off and Landing है. यानी ऐसा इलेक्ट्रिक वाहन जो रनवे की जरूरत के बिना सीधे जमीन से ऊपर उठ सकता है और फिर लंबवत तरीके से लैंड कर सकता है. रवि टम्टा के प्रोटोटाइप में पायलट के बैठने के लिए कॉकपिट बनाया गया है. वाहन को हवा में उठाने और संतुलित रखने के लिए चार प्रोपेलर लगाए गए हैं. पायलट समेत इस प्रोटोटाइप का वजन करीब दो क्विंटल बताया गया है. पूरा ढांचा कार्बन फाइबर से तैयार किया गया है.
रवि टम्टा ने बताया कि मौजूदा प्रोटोटाइप के सफल परीक्षण के बाद अब अगला लक्ष्य इसकी क्षमता और उड़ान अवधि बढ़ाना है. वह ऐसा इलेक्ट्रिक eVTOL तैयार करना चाहते हैं, जो लगातार करीब पांच घंटे तक चल सके. इस प्रोजेक्ट में सुरक्षा को भी विशेष महत्व दिया जा रहा है. वाहन में पैराशूट सिस्टम लगाया जाएगा. अगर उड़ान के दौरान किसी तरह की गंभीर स्थिति पैदा होती है तो पायलट एक बटन दबाकर पैराशूट के जरिए सुरक्षित लैंडिंग कर सकेगा.
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मौसम की जानकारी के लिए भी प्रोग्रामिंग
इस eVTOL को सिर्फ उड़ाने तक सीमित नहीं रखा गया है. इसमें मौसम के पूर्वानुमान जैसी जानकारी के लिए भी प्रोग्रामिंग की गई है. इसका उद्देश्य पायलट को उड़ान के दौरान मौसम से जुड़ी जरूरी जानकारी उपलब्ध कराना है. रवि के अनुसार प्रोटोटाइप को भविष्य में और आधुनिक बनाया जाएगा. इसके डिजाइन और तकनीक में कई बदलाव किए जाने की योजना है.
रवि टम्टा ने बताया कि फिलहाल वह eVTOL की पूरी तकनीकी जानकारी सार्वजनिक नहीं कर सकते. इसकी वजह पेटेंट प्रक्रिया है. उनका कहना है कि अगर तकनीक से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी पहले ही सार्वजनिक हो गई तो पेटेंट कराने में परेशानी आ सकती है. पेटेंट होने के बाद इस प्रोजेक्ट की तकनीकी जानकारी लोगों के सामने रखने की योजना है.