इस बार भाई की कलाई पर सजेगी उत्तराखंड के बीजों वाली राखियां, पिरूल और ऐपण कला से की जा रहीं तैयार
रक्षाबंधन 2026 के लिए उत्तराखंड की महिलाएं बीज, मोती, ऊन, पिरूल और ऐपण कला से स्वदेशी राखियां तैयार कर रही हैं.
हरिद्वार: इस रक्षाबंधन सिर्फ राखी नहीं बल्कि देसी हुनर, महिलाओं की आत्मनिर्भरता और पर्यावरण सुरक्षा का संदेश आपके भाई की कलाई पर सजेगा. उत्तराखंड में सेल्फ़-हेल्प ग्रुप और महिला संगठनों की महिलाएं बीज, मोतियों, ऊन, लकड़ी के बुरादे और ऐपण कला का इस्तेमाल करके आकर्षक राखियां बना रही हैं. इन राखियों में बुने गए बीजों को त्योहार के बाद मिट्टी में बोया जा सकता है ताकि वे पौधे बन सकें.
हरिद्वार बाईपास पर येलो हिल्स स्टोर पर, महिला उत्थान और बाल कल्याण संस्था से जुड़ी सात से आठ महिलाएं फूलों और सब्जियों के बीजों का इस्तेमाल करके बीज वाली राखियां बना रही हैं. राखियों को मक्का, राजमा, बीन्स, भिंडी, सूरजमुखी और भट्ट के बीजों को धागे से सजाकर खास तरीके से सजाया गया है.
बॉक्स कैसे बनता है?
राखी का बॉक्स भी कार्डबोर्ड से बनाया जाता है, जिसे बाद में गमले की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. इसमें एक टीका, चावल, एक मोमबत्ती और दो चॉकलेट भी होती हैं. राखियां संगठन की वेबसाइट से भी खरीदी जा सकती हैं.
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गांव की महिलाएं ऐपण राखियां कर रही हैं तैयार
जय माता दी ग्राम संगठन से जुड़े 10 से ज़्यादा महिला ग्रुप विकासनगर के फतेहपुर गांव में राखियां तैयार कर रहे हैं. महिलाएं थाली और ऐपण राखियों के साथ रंगीन चावल, मखमल का कपड़ा, कार्डबोर्ड, रुद्राक्ष की माला, मोती और ऊन का इस्तेमाल कर रही हैं.
महिला जागृति ग्रुप की महिलाएं गांव में ही ये राखियां तैयार कर रही हैं. 25 से 30 रुपये की राखियां इस हफ्ते करीब 15,000 रुपये में बिकी हैं. महिलाओं के लिए यह सिर्फ एक सीजनल बिजनेस नहीं है, बल्कि अपने हुनर को मार्केट करने और फाइनेंशियली इंडिपेंडेंट होने का एक तरीका भी है.
हैंडक्राफ्ट को 16 सालों से मिल रहा है मार्केट
गढ़ी कैंट में लाइवलीहुड एजुकेशन ऑफिस में करीब 90 महिलाएं और स्टूडेंट्स राखियां तैयार कर रही हैं. यह ऑर्गनाइजेशन पिछले 16 सालों से हाथ से बनी राखियां बना रहा है. इस बार बीज वाली राखियों में गेहूं, जौ, पत्थर और भिंडी का इस्तेमाल किया गया है. जौ से बनी तिरंगी राखियां और ऊन और डोरी के धागों से बनी राखियां भी आकर्षण का केंद्र हैं.
पिरूल से बनी राखियों में पहाड़ों की झलक
पिरूल शक्ति की डायरेक्टर सुमन पंथरी ने पिरूल और रंग-बिरंगे धागों से राखियां बनाई हैं. सुमन 2024 से पिरूल बेस्ड प्रोडक्ट बना रही हैं. उनके प्रोडक्ट्स में ऐपण से प्रेरित फ्रिज मैग्नेट, बॉक्स और कीचेन के साथ-साथ दीये, स्टैंड, तिलक थाली और पारंपरिक मिठाई अरसा शामिल हैं.
उत्तराखंड की ये राखियां भाई-बहन के प्यार को लोकल आर्ट, स्वदेशी सोच, महिलाओं की आत्मनिर्भरता और पर्यावरण सुरक्षा के मैसेज के साथ जोड़ती हैं. खास बात यह है कि रक्षाबंधन के बाद राखी में लगे बीज मिट्टी में पौधे बन सकते हैं, जिससे इस रिश्ते की याद लंबे समय तक बनी रहती है.