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कलम से जनआंदोलन तक... गिर्दा की पुण्यतिथि पर CM धामी ने कुछ यूं किया याद

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोककवि और साहित्यकार गिरीश चंद्र तिवारी ‘गिरदा’ की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी. उन्होंने गिरदा के साहित्य, लोकसंस्कृति और जनआंदोलनों में योगदान को याद किया.

Meenu Singh
Edited By: Meenu Singh
कलम से जनआंदोलन तक... गिर्दा की पुण्यतिथि पर CM धामी ने कुछ यूं किया याद
Courtesy: ANI

उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और जनभावनाओं को अपनी रचनाओं में जगह देने वाले गिरीश चंद्र तिवारी ‘गिर्दा’ को उनकी पुण्यतिथि पर याद किया गया. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. मुख्यमंत्री ने कहा कि गिर्दा ने अपनी लेखनी के जरिए सामाजिक सरोकारों और जनआंदोलनों को मजबूत आवाज दी. उनकी रचनाओं ने उत्तराखंड की लोकपरंपराओं और सामाजिक चेतना को आम लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई.

CM धामी ने दी श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गिरदा की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की सामूहिक चेतना की ओर से महान लोककवि और साहित्यकार को नमन है. मुख्यमंत्री का संदेश गिरदा के साहित्यिक और सामाजिक योगदान के प्रति सम्मान को दर्शाता है.

जनआंदोलनों को मिली आवाज

गिर्दा की पहचान केवल एक साहित्यकार के रूप में नहीं रही, बल्कि उनकी रचनाओं में समाज की आवाज भी सुनाई देती थी. मुख्यमंत्री ने उनके लेखन को सामाजिक सरोकारों और जनआंदोलनों से जुड़ा बताया. उनकी कविताओं और रचनाओं ने आम लोगों की भावनाओं को अभिव्यक्ति देने का काम किया.

लोकसंस्कृति से जोड़ा साहित्य

गिरदा की रचनाओं में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, परंपराओं और सामाजिक जीवन की झलक मिलती है. उनके साहित्य ने पहाड़ की लोकभाषा और लोकभावना को व्यापक पहचान दिलाने में भूमिका निभाई. यही वजह है कि उन्हें उत्तराखंड की सांस्कृतिक चेतना से जुड़े महत्वपूर्ण रचनाकारों में याद किया जाता है.

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि गिरदा की कालजयी रचनाएं आने वाली पीढ़ियों को लगातार प्रेरित करती रहेंगी. उनका साहित्य युवाओं को अपनी लोकसंस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का संदेश देता है. साथ ही, सामाजिक जागरूकता और जनसरोकारों के प्रति संवेदनशील रहने की प्रेरणा भी देता है.