पहाड़ के बच्चों की पढ़ाई को बनाया आसान, गबर सिंह बिष्ट को अब राष्ट्रपति ने किया सम्मानित

उत्तराखंड के दुर्गम पौड़ी क्षेत्र के शिक्षक गबर सिंह बिष्ट ने डिजिटल माध्यमों से ग्रामीण बच्चों की पढ़ाई आसान बनाई. उनके प्रयासों से छात्रवृत्ति और प्रतियोगिताओं में बच्चों की सफलता बढ़ी, जिसके लिए उन्हें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मिला.

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Kanhaiya Kumar Jha

देहरादून: पहाड़ के दूरदराज गांवों में संसाधनों की कमी के बीच बच्चों को बेहतर शिक्षा देना आसान नहीं है. लेकिन पौड़ी के शिक्षक गबर सिंह बिष्ट ने तकनीक और अपने प्रयासों से इस चुनौती को अवसर में बदल दिया. उन्होंने ई-कंटेंट, पीपीटी, ऑनलाइन कक्षाओं और डिजिटल मॉडलों को पढ़ाई का हिस्सा बनाया. इसका असर बच्चों के प्रदर्शन पर भी दिखा. उनके नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली और शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया.

कोरोना महामारी के दौरान स्कूल बंद हुए तो बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने लगी. इसी दौर में गबर सिंह ने ऑनलाइन पढ़ाई का रास्ता अपनाया. उन्होंने गणित और विज्ञान के लिए यू-ट्यूब चैनल बनाया और ई-कंटेंट तैयार किया. पीपीटी के जरिए कठिन विषयों को सरल तरीके से समझाने की कोशिश शुरू हुई. दुर्गम इलाके में इंटरनेट और संसाधनों की कमी के कारण शुरुआत मुश्किल रही, लेकिन धीरे-धीरे ज्यादा बच्चे इस पहल से जुड़ते गए.

प्रोजेक्टर से लेकर 3D मॉडल तक

आज मुस्याखांद स्कूल में पढ़ाई के लिए प्रोजेक्टर और दो कंप्यूटर मौजूद हैं. गबर सिंह अपने दो लैपटाप का भी इस्तेमाल करते हैं. गणित और विज्ञान में एनिमेटेड पीपीटी, जियोजेब्रा मॉडल और 3D सिमुलेशन से बच्चों को पढ़ाया जाता है. स्कूल की छुट्टी के बाद गूगल मीट पर अतिरिक्त कक्षाएं होती हैं. इनमें छात्रवृत्ति और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कराई जाती है. दूरदर्शन देहरादून के ज्ञानदीप कार्यक्रम से भी बच्चों तक सामग्री पहुंचाई गई.


छात्रवृत्ति से संवार रहे भविष्य

पिछले पांच वर्षों में स्कूल के 30 बच्चों का राज्य और राष्ट्रीय स्तर की अलग-अलग छात्रवृत्तियों के लिए चयन हुआ है. इन बच्चों को सालाना 10 हजार, 12 हजार और 15 हजार रुपये तक की छात्रवृत्ति मिली है. वर्ष 2023 में स्कूल में केवल 19 बच्चे रह गए थे, लेकिन लगातार प्रयासों के बाद अब संख्या बढ़कर 40 हो गई है. अभिभावकों का सरकारी स्कूल और वहां मिलने वाली शिक्षा के प्रति भरोसा भी मजबूत हुआ है.

बच्चों ने कमाया नाम

मुस्याखांद स्कूल के बच्चों ने पढ़ाई के साथ विभिन्न प्रतियोगिताओं में भी पहचान बनाई है. राष्ट्रीय आविष्कार अभियान की प्रश्नोत्तरी में विद्यालय के विद्यार्थियों ने कई बार सफलता हासिल की. इंस्पायर अवार्ड के लिए 13 बच्चों का चयन हुआ. राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रश्नोत्तरी तथा निबंध प्रतियोगिताओं में भी विद्यार्थी शीर्ष तीन स्थानों तक पहुंचे हैं. राज्य कल्याण परिषद की ओर से होने वाले शैक्षणिक भ्रमण में भी जिले से इस विद्यालय के बच्चों को अवसर मिलता है.

गबर सिंह को मिले कई सम्मान

गबर सिंह ने अपने पूरे सेवा काल में दुर्गम क्षेत्र में ही काम किया है. वर्ष 1991 में पौड़ी के प्राथमिक विद्यालय खुटिड़ा में सहायक अध्यापक बने. 1996 में उच्च प्राथमिक विद्यालय खुटिड़ा में पढ़ाया और 2003 से मुस्याखांद में तैनात हैं. राष्ट्रीय स्तर पर मास्टर ट्रेनर के रूप में वह कई सेमिनार और नेतृत्व कार्यक्रमों में शामिल हो चुके हैं. उन्हें 2019 में राज्यपाल पुरस्कार और 2021 में शैलेश मटियानी पुरस्कार मिला. अब राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार ने उनकी उपलब्धियों में एक और अध्याय जोड़ दिया है.