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Nanda Gaura Yojana: उत्तराखंड की बेटियों के खातों में पहुंचे 19.23 करोड़ रुपये, मंत्री रेखा आर्या ने जारी की नंदा गौरा योजना की राशि

उत्तराखंड सरकार ने नंदा गौरा योजना के तहत हरिद्वार और उत्तरकाशी की 4098 बालिकाओं के खातों में 19.23 करोड़ रुपये की सहायता राशि भेजी है.

Ashutosh
Edited By: Ashutosh Rai
Nanda Gaura Yojana: उत्तराखंड की बेटियों के खातों में पहुंचे 19.23 करोड़ रुपये, मंत्री रेखा आर्या ने जारी की नंदा गौरा योजना की राशि
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राज्य सरकार ने बेटियों की शिक्षा और भविष्य को मजबूत बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है. महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने नंदा गौरा योजना के अंतर्गत पात्र बालिकाओं को आर्थिक सहायता जारी कर यह संदेश दिया कि हर बेटी का विकास सरकार की प्राथमिकता है.

4098 बालिकाओं को मिला योजना का लाभ

देहरादून स्थित यमुना कॉलोनी कैंप कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान नंदा गौरा योजना की सहायता राशि जारी की गई. इस अवसर पर महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि हरिद्वार और उत्तरकाशी जिले की 4098 पात्र बालिकाओं के खातों में 19.23 करोड़ रुपये सीधे डीबीटी के माध्यम से भेजे गए हैं. सरकार का उद्देश्य बेटियों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और उनकी पढ़ाई को प्रोत्साहित करना है. इस सहायता से कई परिवारों को अपनी बेटियों की शिक्षा और आगे की योजनाओं में मदद मिलेगी.

पहले छूट गई थीं कुछ पात्र बालिकाएं

मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में फरवरी माह में प्रदेश की 33,251 बालिकाओं को योजना का लाभ दिया गया था. हालांकि, हरिद्वार और उत्तरकाशी की कुछ बालिकाओं के मामलों में आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया और जिला स्तरीय समिति से मंजूरी समय पर पूरी नहीं हो सकी थी. इसी कारण वे उस समय सहायता राशि प्राप्त नहीं कर पाई थीं. अब सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद इन बालिकाओं को भी योजना का लाभ दे दिया गया है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी पात्र बेटी को योजना से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा.

जन्म से उच्च शिक्षा तक मिल रहा सहयोग

नंदा गौरा योजना का उद्देश्य बेटियों को जीवन के महत्वपूर्ण चरणों में आर्थिक सहयोग देना है. इस बार सहायता प्राप्त करने वाली 417 बालिकाएं ऐसी हैं जिन्हें जन्म के समय योजना का लाभ मिला है. वहीं 3681 बालिकाएं वे हैं जिन्होंने 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद स्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया है. सरकार का मानना है कि शिक्षा के क्षेत्र में आर्थिक सहयोग मिलने से बेटियां अपने सपनों को पूरा करने के लिए आगे बढ़ सकेंगी.