उत्तराखंड की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए बड़ा फैसला, 25 सालों के लिए 1320 मेगावाट बिजली खरीद को मंजूरी

उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने राज्य की भविष्य की बिजली जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यूपीसीएल को 25 वर्षों के लिए 1320 मेगावाट राउंड-द-क्लाक कोयला आधारित बिजली खरीदने की अनुमति दे दी है. आयोग का मानना है कि आने वाले वर्षों में बढ़ती मांग और संभावित बिजली संकट से निपटने के लिए यह निर्णय उपभोक्ताओं के हित में है.

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Shanu Sharma

उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) ने उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) को 25 वर्षों के लिए 1320 मेगावाट राउंड-द-क्लाक कोयला आधारित बिजली खरीदने की स्वीकृति प्रदान कर दी है. आयोग के अनुसार यह बिजली वित्तीय वर्ष 2030-31 से उपलब्ध होगी और इसकी खरीद टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से की जाएगी. यह व्यवस्था राज्य की दीर्घकालिक बिजली आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर की गई है.

यूईआरसी के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, अनुराग शर्मा और सदस्य प्रभात किशोर डिमरी की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि राज्य में हर वर्ष बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है. अगर समय पर फैसला नहीं लिया गया तो समस्या बढ़ सकती है. आयोग ने इस फैसले को उपभोक्ताओं के हित में बताते हुए कहा कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए अभी से तैयारी करना जरूरी है.

भारी बिजली कमी की आशंका

आयोग ने केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि यदि नई दीर्घकालिक व्यवस्था नहीं की गई तो वर्ष 2035-36 तक राज्य में करीब 9192 मिलियन यूनिट बिजली की कमी हो सकती है. वहीं यूपीसीएल के आकलन के अनुसार वर्ष 2030-31 में लगभग सभी महीनों में 446 मेगावाट से 1311 मेगावाट तक बिजली का घाटा रहेगा. यह कमी आने वाले वर्षों में और बढ़ सकती है.


आयोग के अनुसार यदि मांग इसी गति से बढ़ती रही तो वर्ष 2039-40 तक कई महीनों में बिजली का मासिक घाटा 2500 मेगावाट से अधिक पहुंच सकता है. ऐसी स्थिति में बिजली की उपलब्धता प्रभावित होने के साथ उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ने की भी आशंका रहेगी. इसी कारण आयोग ने 1320 मेगावाट बिजली खरीद को राज्य के लिए आवश्यक माना है.

निर्माण अवधि के कारण बदली आपूर्ति की समय सीमा

यूपीसीएल ने अपने प्रस्ताव में वर्ष 2029-30 से बिजली आपूर्ति शुरू करने की बात कही थी, लेकिन आयोग ने पाया कि परियोजना के निर्माण में लगभग 48 महीने लगेंगे. इसलिए वास्तविक आपूर्ति वित्तीय वर्ष 2030-31 से ही संभव होगी. इसी आधार पर आयोग ने मंजूरी भी उसी अवधि से प्रभावी मानी है.

आयोग ने कहा कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद जुलाई से सितंबर के दौरान कुछ समय के लिए राज्य में बिजली अधिशेष रह सकती है. ऐसे में यूपीसीएल को अतिरिक्त बिजली के बेहतर उपयोग और प्रबंधन की स्पष्ट रणनीति तैयार करनी होगी. साथ ही आयोग ने सुझाव दिया कि बिजली प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक समर्पित पावर मैनेजमेंट ग्रुप या सेल का गठन किया जाए.