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अंकिता भंडारी हत्याकांड में देहरादून में हुई महापंचायत, सरकार को 15 दिन का दिया अल्टीमेटम, रखीं ये 5 मांगें

इस महापंचायत का मुख्य उद्देश्य अंकिता की हत्या के लिए जिम्मेदार वीवीआईपी को बेनकाब कर उन्हें सजा दिलवाना और मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना था. महापंचायत के दौरान 5 बड़े प्रस्ताव पास किए गए

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
अंकिता भंडारी हत्याकांड में देहरादून में हुई महापंचायत, सरकार को 15 दिन का दिया अल्टीमेटम, रखीं ये 5 मांगें
Courtesy: @harishrawatcmuk

उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी मर्डर केस में न्याय की मांग को लेकर रविवार को देहरादून में अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले एक विशाल महापंचायत का आयोजन किया गया. इस महापंचायत में अंकिता के माता-पिता, सोनी देवी और वीरेंद्र सिंह भंडारी भी मौजूद रहे. इस महापंचायत का मुख्य उद्देश्य अंकिता की हत्या के लिए जिम्मेदार वीवीआईपी को बेनकाब कर उन्हें सजा दिलवाना और मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना था. महापंचायत के दौरान 5 बड़े प्रस्ताव पास किए गए जिन्हें अब राष्ट्रपति को भेजा जाएगा.

सिटिंग जज की निगरानी में हो जांच

महापंचायत में पारित पहले प्रस्ताव में मांग उठाई गई कि अंकिता के माता-पिता ने सीएम को जो प्रार्थना पत्र सौंपा है उसी को सीबीआई जांच का मुख्य आधार बनाया जाए, साथ ही हाईकोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में पूरे मामले की जांच कराई जाए.

सबूत मिटाने वालों को मिले सजा

दूसरे प्रस्ताव में कहा गया कि अनिल प्रकाश जोसी नामक व्यक्ति द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर सीबीआई जांच का निर्णय मंजूर नहीं है. उन्होंने मांग की कि ऋषिकेश के लक्ष्मण झूला थाने में दर्ज मूल एफआईआर संख्या 01/2022 के तहत जांच आगे बढ़नी चाहिए और इसी FIR के आधार पर उन वीआईपी और रसूखदारों को सजा मिलनी चाहिए जिन्होंने सबूत मिटाए हैं.

जांच पूरी होने तक पद पर ना रहें सीएम धामी

तीसरे प्रस्ताव में कहा गया कि अंकिता हत्याकांड के तुरंत बाद वन्तारा रिजॉर्ट के अहम हिस्से पर बुलडोजर चला दिया गया और केस के अहम सबूत नष्ट कर दिए गए. महापंचायत ने माना कि जब तक इस केस की जांच पूरी नहीं हो जाती तब तक सीएम धामी को अपने पद से अलग रहना चाहिए ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके.

हत्याकांड में सामने आए नामों की हो जांच

चौथे प्रस्ताव में सत्ताधारी पार्टी से जुड़े दो कथित नामों को जांच के दायरे में लाए जाने की मांग की गई. महापंचायत ने कहा कि बीजेपी के दुष्यंत कुमार गौतम और अजय कुमार को भी जांच प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाए और उनसे गहन पूछताछ की जाए और जांच पूरी होने तक पार्टी के इन दोनों पदाधिकारियों को पद से हटाया जाए.

15 दिनों का दिया अल्टीमेटम

महापंचायत के अंतिम प्रस्ताव में कहा गया कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर अंकिता के माता-पिता की मांग के अनुसार सीबीआई जांच शुरू नहीं हुई और वीआईपी के नामों को सार्वजनिक नहीं किया गया तो विशाल जन आंदोलन शुरू किया जाएगा.