न रंग की जरूरत, न कोई खास चीज... धीमी आंच पर तैयार होता है कुमाऊं का खास ब्राउन कलाकंद

कुमाऊं की मशहूर ब्राउन कलाकंद दूध, पनीर, मावा और चीनी से तैयार होने वाली खास मिठाई है. जानिए इसका भूरा रंग कैसे आता है, इसकी दानेदार-मुलायम बनावट क्यों खास है और इसे पारंपरिक तरीके से कैसे तैयार किया जाता है.

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Babli Rautela

कुमाऊं की पारंपरिक मिठाइयों में ब्राउन कलाकंद का स्वाद और रंग इसे खास बनाते हैं. दूध, पनीर, मावा और चीनी से तैयार होने वाली इस मिठाई का भूरा रंग किसी कृत्रिम रंग से नहीं, बल्कि धीमी आंच पर लंबे समय तक पकाने से आता है. जानिए क्या है ब्राउन कलाकंद की खासियत और इसे बनाने का पारंपरिक तरीका. उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में खान-पान की अपनी एक अलग पहचान है. यहां पहाड़ी स्वाद के साथ-साथ दूध से बनने वाली कई पारंपरिक मिठाइयां भी काफी पसंद की जाती हैं. इन्हीं में से एक है ब्राउन कलाकंद, जो देखने में सामान्य कलाकंद से अलग नजर आता है और अपने खास स्वाद के लिए जाना जाता है. इसका हल्का भूरा रंग, मुलायम बनावट और हल्का सोंधा-कैरमल जैसा स्वाद इसे दूसरी दूध से बनी मिठाइयों से अलग बनाता है.

दूध, पनीर और मावे से तैयार होता है ब्राउन कलाकंद

ब्राउन कलाकंद बनाने के लिए मुख्य रूप से फुल क्रीम दूध, ताजा पनीर या छेना, मावा, चीनी और इलायची का इस्तेमाल किया जाता है. इसकी खासियत सिर्फ सामग्री में नहीं, बल्कि इसे तैयार करने के तरीके में भी छिपी है. सबसे पहले दूध को बड़े बर्तन में डालकर धीमी आंच पर पकाया जाता है. दूध को लगातार चलाते हुए धीरे-धीरे गाढ़ा किया जाता है. जब दूध का पानी कम होने लगता है, तब इसमें पनीर या छेना और मावा मिलाया जाता है. इसके बाद पूरे मिश्रण को धीमी आंच पर लगातार चलाया जाता है, ताकि यह बर्तन के तले में चिपके नहीं और सभी सामग्री अच्छी तरह आपस में मिल जाए.

बिना किसी कृत्रिम रंग के आता है भूरापन

ब्राउन कलाकंद की सबसे खास पहचान इसका भूरा रंग है. स्थानीय जानकारों के मुताबिक, इसके लिए किसी कृत्रिम रंग की जरूरत नहीं पड़ती. दूध और मावे को लंबे समय तक धीमी आंच पर पकाने के दौरान उनमें प्राकृतिक ब्राउनिंग होती है, जिससे मिश्रण का रंग धीरे-धीरे बदलता जाता है. जितनी देर मिश्रण पकता है, उसका रंग उतना ही गहरा हो सकता है. इसी प्रक्रिया के कारण मिठाई में हल्का सोंधा और कैरमल जैसा स्वाद भी विकसित होता है. यही स्वाद ब्राउन कलाकंद को सामान्य सफेद या हल्के रंग के कलाकंद से अलग पहचान देता है.


दानेदार लेकिन मुलायम होती है इसकी बनावट

ब्राउन कलाकंद की एक और खासियत इसकी टेक्सचर यानी बनावट है. अच्छी तरह तैयार कलाकंद पूरी तरह चिकना नहीं होता. इसमें पनीर या छेना और मावे की वजह से छोटे-छोटे दाने महसूस होते हैं. हालांकि, इसके बावजूद मिठाई मुलायम रहती है और मुंह में आसानी से घुल जाती है. मिश्रण को सही समय तक पकाना इसके लिए बेहद जरूरी होता है. अगर इसे बहुत कम पकाया जाए तो मिठाई अच्छी तरह सेट नहीं होगी, जबकि जरूरत से ज्यादा पकाने पर यह सख्त हो सकती है.

इलायची और मेवों से बढ़ता है स्वाद

ब्राउन कलाकंद में इलायची का इस्तेमाल स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए किया जाता है. दूध, मावा और पनीर के गाढ़े मिश्रण में इलायची की हल्की खुशबू मिठाई के स्वाद को और बेहतर बनाती है. मिश्रण तैयार होने के बाद इसे एक थाली या ट्रे में फैलाकर जमाया जाता है. ठंडा होने के बाद इसे चौकोर या मनचाहे आकार के टुकड़ों में काटा जाता है. ऊपर से पिस्ता, बादाम या दूसरे मेवे डालकर इसे सजाया जा सकता है. सादगी के बावजूद इसकी ब्राउन रंग की सतह और मेवों की सजावट इसे आकर्षक बनाती है.