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केदरनाथ में क्यों विराजमान है त्रिकोणीय शिवलिंग? क्या है इसके पीछे की कहानी, महाभारत काल से जुड़ा है लिंक!

चार धामों में केदनाथ धाम लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है. लेकिन यहां की शिवलिंग के आकार को लेकर सवाल रहता है. लेकिन इसके पीछे एक रोचक कहनी छिपी है. आइए जानते हैं, इस कहानी के बारे में.

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Edited By: Shanu Sharma
केदरनाथ में क्यों विराजमान है त्रिकोणीय शिवलिंग? क्या है इसके पीछे की कहानी, महाभारत काल से जुड़ा है लिंक!
Courtesy: X (@ShriKedarnath)

हिमालय की ऊंची चोटियों की गोद में बसा केदारनाथ धाम न सिर्फ अपनी मनमोहक प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्व प्रसिद्ध है, बल्कि अपनी गहरी धार्मिक मान्यताओं और प्राचीन रहस्यों के लिए भी जाना जाता है. हर साल की तरह इस साल भी चारधाम यात्रा शुरू हो चुकी है और देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु बाबा केदारनाथ के दर्शन के लिए उमड़ पड़े हैं. 

केदारनाथ मंदिर की सबसे अनोखी विशेषता यहां विराजमान त्रिकोणीय शिवलिंग है. जबकि देश के अन्य ज्योतिर्लिंग गोलाकार या अंडाकार आकार के हैं, केदारनाथ का शिवलिंग बैल की पीठ की तरह त्रिकोणीय क्यों है? इस प्रश्न का उत्तर महाभारत काल की एक रोचक कथा में छिपा है.

क्या है इसके पीछे की कहानी?

कहानी के मुताबिक महाभारत में जीतने के बाद भी पांडव दुख और सदमे में थे. अपने ही सगे-संबंधियों, गुरुजनों और बंधुओं की हत्या के कारण उन पर गोत्र हत्या और ब्रह्म हत्या जैसे गंभीर पाप लग गए थे. इस पाप भार से मुक्ति पाने के लिए उन्होंने महर्षि व्यास की शरण ली. व्यास जी ने उन्हें सलाह दी कि वे भगवान शिव की आराधना करें और उनकी कृपा से ही इस पाप से छुटकारा मिल सकता है.

पांडव भगवान शिव को खोजते हुए पहले काशी पहुंचे. लेकिन महादेव युद्ध में हुए भयानक नरसंहार से अत्यंत रुष्ट थे. वे पांडवों को दर्शन देने को तैयार नहीं थे. इसलिए वे काशी छोड़कर गुप्तकाशी चले गए. पांडवों ने हार नहीं मानी और महादेव का पीछा करते हुए हिमालय की दुर्गम पहाड़ियों तक पहुंच गए.

महादेव ने क्यों बदला था रूप?

कहानी के मुताबिक पांडव जब महादेव के पास पहुंचने लगे तो शिव जी ने अपना रूप बदलकर एक साधारण बैल का आकार धारण कर लिया और पशुओं के एक झुंड में घुल-मिल गए. पांडवों को संदेह हो गया कि भगवान शिव उसी झुंड में छिपे हुए हैं. तब भीम ने अपना विशाल रूप धारण किया और दो पहाड़ों के बीच पैर फैलाकर खड़े हो गए. झुंड के सभी पशु भीम के पैरों के नीचे से निकल गए, लेकिन भगवान शिव रूपी बैल ने ऐसा करने से इनकार कर दिया. जैसे ही भीम ने बैल को पकड़ने का प्रयास किया, भोलेनाथ जमीन में समाने लगे. भीम ने तुरंत अपनी फुर्ती दिखाई और बैल की पीठ का कूबड़ थाम लिया.

पांडवों की अटूट भक्ति और दृढ़ संकल्प को देखकर भगवान शिव प्रसन्न हो गए. उन्होंने पांडवों को प्रत्यक्ष दर्शन दिए और उनके समस्त पापों से मुक्ति प्रदान की. इसी घटना के स्मरण में केदारनाथ धाम में भगवान शिव की पूजा आज भी उसी बैल की पीठ के कूबड़ वाले रूप में की जाती है, जो त्रिकोणीय आकार में है. यही कारण है कि केदारनाथ का शिवलिंग अन्य ज्योतिर्लिंगों से अलग दिखता है.