देहरादून: उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई के दौरान मशहूर बाघ 'भोला' गंभीर रूप से घायल हो गया. दूसरे बाघ के साथ हुई खूनी भिडंत में उसके शरीर पर कई गहरे घाव हो गए. समय पर इलाज नहीं मिलने से घावों में संक्रमण फैल गया और उसकी हालत लगातार बिगड़ने लगी. वन विभाग को सूचना मिलने के बाद देर रात विशेष रेस्क्यू अभियान चलाकर बाघ को सुरक्षित बचाया गया. फिलहाल उसका इलाज कॉर्बेट रेस्क्यू सेंटर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में जारी है.
जानकारी के अनुसार भोला कॉर्बेट के फाटो, झिरना और ढेला सफारी जोन में अक्सर पर्यटकों को दिखाई देता था. क्षेत्र पर कब्जे और वर्चस्व की लड़ाई के दौरान उसकी दूसरे बाघ से जबरदस्त भिडंत हुई. इस संघर्ष में भोला बुरी तरह घायल हो गया. उसके शरीर पर कई गहरे जख्म हो गए और समय बीतने के साथ उनमें संक्रमण फैल गया. कुछ घावों में कीड़े भी पड़ गए, जिससे उसकी हालत और ज्यादा गंभीर हो गई.
VIDEO | Ramnagar, Uttarakhand: Corbett park's injured tiger 'Bhola' rescued; treatment underway at Ramnagar's Dhela rescue center.
— Press Trust of India (@PTI_News) June 26, 2026
(Source: Third Party)#Uttarakhand pic.twitter.com/QQFDG8ghxC
घायल होने के बाद भोला के लिए जंगल में शिकार करना भी मुश्किल हो गया. कमजोर होने के कारण वह अपने लिए भोजन जुटाने में असमर्थ था. जब उसकी गंभीर हालत की जानकारी कॉर्बेट प्रशासन तक पहुंची तो वन विभाग की टीम तुरंत सक्रिय हो गई. वन्यजीव विशेषज्ञों और चिकित्सकों ने बाघ की स्थिति का आकलन किया और बताया कि यदि तुरंत इलाज नहीं किया गया तो उसकी जान को खतरा हो सकता है.
इसके बाद देर रात वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सा अधिकारी डॉ. दुष्यंत शर्मा के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम ने रेस्क्यू अभियान शुरू किया. चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच बाघ को सुरक्षित तरीके से ट्रैंक्विलाइज किया गया और बिना किसी अतिरिक्त नुकसान के उसे रेस्क्यू सेंटर लाया गया. वहां पहुंचते ही उसके घावों की सफाई, संक्रमण रोकने और अन्य जरूरी इलाज की प्रक्रिया शुरू कर दी गई.
कॉर्बेट प्रशासन ने बताया कि भोला की हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है. विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम उसे पूरी तरह स्वस्थ करने का प्रयास कर रही है ताकि इलाज पूरा होने के बाद उसे दोबारा उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा सके. वन विभाग का कहना है कि जंगल में बाघों के बीच क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर संघर्ष सामान्य बात है, लेकिन कई बार ऐसे संघर्ष जानलेवा साबित होते हैं.
यह रेस्क्यू अभियान वन विभाग की त्वरित कार्रवाई और वन्यजीव संरक्षण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का उदाहरण माना जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि समय पर किए गए इस अभियान ने एक बेशकीमती वन्यजीव की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. अब सभी की नजर भोला के जल्द स्वस्थ होकर फिर से जंगल में लौटने पर टिकी है.