जिस 'मोहम्मद दीपक' की राहुल गांधी ने की थी तारीफ, अब कोर्ट ने उसे क्यों लगाई फटकार?
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मोहम्मद दीपक की एफआईआर रद्द करने की याचिका खारिज कर दी और उन्हें फटकार लगाई. कोर्ट ने कहा कि आरोपी पुलिस सुरक्षा की मांग नहीं कर सकता. साथ ही सोशल मीडिया पर टिप्पणी से रोक लगा दी.
नई दिल्ली: कोटद्वार के जिम संचालक मोहम्मद दीपक, जिन्हें राहुल गांधी ने 10 जनपथ बुलाकर सम्मानित किया था, अब मुश्किल में हैं. उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उनकी एफआईआर रद्द करने की याचिका खारिज कर दी है. साथ ही कोर्ट ने उन्हें कड़ी फटकार लगाते हुए गैग ऑर्डर जारी किया है. कोर्ट ने यह भी कहा कि एक आरोपी पुलिस सुरक्षा की मांग कैसे कर सकता है.
मोहम्मद दीपक पर 26 जनवरी को कोटद्वार में हुई घटना के संबंध में दंगा करने, चोट पहुंचाने और शांति भंग करने के आरोप में मामला दर्ज हुआ है. दीपक ने एफआईआर रद्द कराने और पुलिस सुरक्षा की मांग करते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. उन्होंने पुलिस अधिकारियों पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए जांच की मांग भी की थी.
कोर्ट ने क्यों लगाई फटकार?
हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद दीपक की सभी मांगें खारिज कर दीं. कोर्ट ने पूछा कि एक आरोपी पुलिस सुरक्षा की मांग कैसे कर सकता है. अदालत ने इसे जांच प्रभावित करने की कोशिश बताया. साथ ही दीपक को निर्देश दिया कि जांच पूरी होने तक वे सोशल मीडिया पर ऐसी कोई टिप्पणी न करें, जिससे जांच प्रभावित हो. कोर्ट ने यह सख्त आदेश जारी किया है.
चंदे का हिसाब भी मांगा
कोर्ट ने दीपक के खाते में आ रहे चंदे का भी पूरा ब्योरा तलब किया है. दीपक का कहना है कि घटना का वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें देशभर से 100 से 500 रुपये तक का चंदा मिला है. उनके खाते में करीब 80 हजार रुपये आए हैं. दीपक का दावा है कि यह पैसा लोगों ने खुद दिया, उन्होंने नहीं मांगा.
कैसे बने 'मोहम्मद दीपक'?
26 जनवरी को कोटद्वार में एक दुकान के नाम से 'बाबा' शब्द हटाने को लेकर हिंदूवादी कार्यकर्ताओं से दीपक की बहस हुई थी. जब लोगों ने दीपक से उसका नाम पूछा तो उन्होंने कहा- मोहम्मद दीपक. इसके बाद वीडियो वायरल हुआ और वे चर्चा में आ गए. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उनकी तारीफ करते हुए दिल्ली बुलाया था. हालांकि अब विवाद के बाद उनके जिम में मेंबरों की संख्या 150 से घटकर 15 रह गई है और परिवार भी मुश्किल में है.