देहरादून: उत्तराखंड में शुक्रवार सुबह से मौसम ने अचानक करवट ले ली है. मैदानी इलाकों में लगातार बारिश हो रही है, जबकि हिमालयी क्षेत्रों में जोरदार बर्फबारी दर्ज की गई है. इस बदले मौसम ने जहां पर्यटन कारोबार और किसानों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है, वहीं आम लोगों की मुश्किलें भी बढ़ी हैं. बर्फबारी के चलते कई रास्ते बंद हो गए हैं और प्रशासन को सतर्क कदम उठाने पड़े हैं. मौसम विभाग के पूर्वानुमान के बाद कई जिलों में स्कूल बंद करने का फैसला लिया गया है.
राज्य के देहरादून, हरिद्वार और आसपास के मैदानी इलाकों में सुबह से हल्की से मध्यम बारिश होती रही. वहीं उत्तरकाशी, टिहरी, चमोली और पिथौरागढ़ जैसे पर्वतीय जिलों में जोरदार बर्फबारी हुई है. लंबे समय बाद हुई इस बर्फबारी से पहाड़ों का प्राकृतिक सौंदर्य लौट आया है और ठंड में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
पिथोरागढ़ के बेरीनाग में भी बर्फबारीpic.twitter.com/cDJJgwdCdi
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मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए पौड़ी, उत्तरकाशी, टिहरी और पिथौरागढ़, देहरादून और अल्मोड़ा जिला प्रशासन ने 24 जनवरी को कक्षा एक से 12 तक के सभी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद रखने के आदेश जारी किए हैं. प्रशासन का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है. सभी शासकीय, अशासकीय और निजी शिक्षण संस्थानों पर यह आदेश लागू रहेगा.
टिहरी जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि मौसम विभाग देहरादून ने बारिश और बर्फबारी का पूर्वानुमान जारी किया है. किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए एहतियात जरूरी है. प्रशासन ने पहले से ही बर्फ हटाने की तैयारी कर रखी है. कई संवेदनशील इलाकों में जेसीबी और अन्य मशीनें तैनात की गई हैं.
लगातार बर्फबारी के कारण कई मुख्य और ग्रामीण सड़कें बंद हो गई हैं. पहाड़ी इलाकों में फिसलन बढ़ने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है. प्रशासन का दावा है कि जहां भी सड़कें बंद हुई हैं, उन्हें जल्द खोलने का प्रयास किया जा रहा है. यात्रियों और पर्यटकों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है ताकि किसी तरह का जोखिम न उठाना पड़े.
नैनीताल में भी बर्फबारी से सैलानियों के चेहरे खिले. देखें नयना पीक का नजारा. pic.twitter.com/vNvUjXHloS
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यह साल की पहली बर्फबारी मानी जा रही है, जिसका लोग लंबे समय से इंतजार कर रहे थे. बर्फबारी और बारिश से जंगलों में लगी आग पर भी काबू मिलने की उम्मीद है. सबसे ज्यादा राहत सेब काश्तकारों को मिली है, जो बर्फ न पड़ने से फसल को लेकर चिंतित थे. विशेषज्ञों के अनुसार यह मौसम सेब की पैदावार के लिए फायदेमंद साबित होगा और पहाड़ों के पर्यावरण को भी संजीवनी देगा.