हरिद्वार भूमि खरीद मामले में सरकार सख्त, दो IAS और एक PCS समेत कई अधिकारियों पर गिरी गाज

हरिद्वार नगर निगम की विवादित भूमि खरीद मामले में उत्तराखंड सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए एक आईएएस अधिकारी की बर्खास्तगी की संस्तुति की है.

ANI
Shanu Sharma


उत्तराखंड की नौकरशाही इन दिनों एक ऐसे भूमि खरीद विवाद को लेकर चर्चा में है, जिसने प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. हरिद्वार नगर निगम द्वारा की गई एक भूमि खरीद की जांच के बाद राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए कई वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है. 

इस मामले में एक आईएएस अधिकारी की सेवा समाप्त करने की संस्तुति की गई है, जबकि अन्य अधिकारियों पर भी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की तलवार लटक गई है.

क्या है पूरा मामला?

विवाद की जड़ हरिद्वार नगर निगम द्वारा वर्ष 2025 में की गई एक भूमि खरीद है. आरोप है कि जिस जमीन का अनुमानित बाजार मूल्य करीब 14 करोड़ रुपये था, उसे लगभग 54 करोड़ रुपये में खरीदा गया. जमीन की कीमत और खरीद प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने के बाद मामला राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया. सरकारी धन के उपयोग और खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों ने राज्य सरकार को जांच के आदेश देने पर मजबूर कर दिया. इसके बाद पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू हुई.


मुख्यमंत्री के निर्देश पर हुई गहन जांच

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ अधिकारी रणवीर चौहान को जांच की जिम्मेदारी सौंपी. जांच टीम ने भूमि खरीद से जुड़ी फाइलों, अनुमोदन प्रक्रियाओं, मूल्यांकन रिपोर्टों और अन्य दस्तावेजों की विस्तार से समीक्षा की. इसके अलावा संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए गए. कई सप्ताह तक चली जांच के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को सौंपी गई.

सूत्रों के अनुसार करीब 100 पन्नों की जांच रिपोर्ट में कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्होंने भूमि खरीद प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर प्रश्न खड़े किए. रिपोर्ट में प्रशासनिक स्तर पर कथित अनियमितताओं और प्रक्रियागत चूकों का उल्लेख किया गया है. इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर राज्य सरकार ने कार्रवाई का निर्णय लिया. सरकार का मानना है कि सार्वजनिक धन के उपयोग में जवाबदेही सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है.

किन अधिकारियों पर हुई कार्रवाई?

सरकार ने तत्कालीन नगर आयुक्त और आईएएस अधिकारी वरुण चौधरी के खिलाफ सेवा से बर्खास्तगी की संस्तुति की है. वहीं तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह के खिलाफ मेजर पनिशमेंट की प्रक्रिया शुरू की गई है. इसके अलावा तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज करने और उनकी तीन वेतनवृद्धियां रोकने का निर्णय लिया गया है.

मामले से जुड़े 10 अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि सरकारी धन से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या कथित अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.