भीमताल में 16 जुलाई से गूंजेगा हरेला मेला, खेल-कूद और लोक संस्कृति से सजेगा आयोजन

नगर पालिका परिषद भीमताल की अध्यक्ष सीमा टम्टा ने बताया कि इस वर्ष मेले को और ज्यादा आकर्षक बनाने की कोशिश की जा रही है. युवाओं को ध्यान में रखते हुए विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी. खासतौर पर वॉलीबॉल और तैराकी की प्रतियोगिताएं युवा खिलाड़ियों के बीच जोश भरेंगी.

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भीमताल: कुमाऊं की धरती पर लोक संस्कृति और प्रकृति का प्रतीक हरेला महोत्सव इस बार भीमताल में धूमधाम से मनाया जाएगा. 16 जुलाई से 21 जुलाई तक छह दिन चलने वाले इस ऐतिहासिक मेले में खेल, संस्कृति और परंपराओं का अनोखा संगम देखने को मिलेगा. स्थानीय प्रशासन और आयोजकों ने मेले को भव्य बनाने की पूरी तैयारी कर ली है.

भीमताल में 16 जुलाई से गूंजेगा हरेला मेला

नगर पालिका परिषद भीमताल की अध्यक्ष सीमा टम्टा ने बताया कि इस वर्ष मेले को और ज्यादा आकर्षक बनाने की कोशिश की जा रही है. युवाओं को ध्यान में रखते हुए विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी. खासतौर पर वॉलीबॉल और तैराकी की प्रतियोगिताएं युवा खिलाड़ियों के बीच जोश भरेंगी. इन खेलों के जरिए स्थानीय युवा अपनी प्रतिभा दिखा सकेंगे और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का माहौल बनेगा.

खेल-कूद और लोक संस्कृति से सजेगा आयोजन

मां केंचुला त्रिवेणी संगम समिति की ओर से मेले में लोक कला को बढ़ावा देने के लिए खास आयोजन किया गया है. रामलीला मैदान में प्रसिद्ध ऐपण प्रतियोगिता आयोजित होगी। यह प्रतियोगिता दो श्रेणियों में होगी – 'सामान्य ऐपण' और 'शिव पीठ लक्ष्मी चौकी ऐपण.' दोनों श्रेणियों में बेहतरीन काम करने वाले कलाकारों को पुरस्कार दिए जाएंगे. ऐपण कुमाऊं की पारंपरिक कला है, जो दीवारों और फर्श पर चावल के आटे से बनाई जाती है. इस प्रतियोगिता के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है.


मेले का सबसे बड़ा आकर्षण सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे. शाम के समय भव्य सांस्कृतिक संध्याएं आयोजित की जाएंगी, जिनमें उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे. गढ़वाली और कुमाऊंनी लोक गीत, नृत्य और लोक वाद्यों की धुन मेले में चार चांद लगाएगी. लोग इन कार्यक्रमों का भरपूर आनंद उठा सकेंगे.

हरेला त्योहार हरे-भरे वातावरण और नई फसल के आने का प्रतीक माना जाता है. यह मेले के रूप में न सिर्फ मनोरंजन का साधन है बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देता है. मेले के दौरान स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प और खान-पान की विशेष दुकानें लगाई जाएंगी, जिससे पर्यटक और स्थानीय लोग दोनों लाभान्वित होंगे.