नीट के बाद सरकारी एमबीबीएस सीटों पर फर्जीवाड़ा, पांच के खिलाफ केस दर्ज
देहरादून में नीट परीक्षा के बाद सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे की सीटों पर दाखिले में बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है. इस आरक्षित कोटे की कुल नौ सीटें आवंटित हुई थीं. इनमें से पांच अभ्यर्थियों ने दाखिला ले लिया था.
देहरादून: देहरादून में नीट परीक्षा के बाद सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे की सीटों पर दाखिले में बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है. इस आरक्षित कोटे की कुल नौ सीटें आवंटित हुई थीं. इनमें से पांच अभ्यर्थियों ने दाखिला ले लिया था. सत्यापन के दौरान दस्तावेजों में गड़बड़ी पकड़ी गई, जिसके बाद चार के दाखिले रद्द कर दिए गए हैं.
नीट के बाद सरकारी एमबीबीएस सीटों पर फर्जीवाड़ा
जिलाधिकारी कार्यालय के आदेश पर जांच हुई. राजस्व विभाग से जारी प्रमाण-पत्र फर्जी पाए गए. इन प्रमाण-पत्रों को निरस्त कर दिया गया. अब पुलिस ने दो थानों में मुकदमे दर्ज किए हैं. रायपुर थाने में कंडोली के पटवारी जगदीश कुमार और क्लेमनटाउन थाने में पटवारी डिंपल की शिकायत पर कार्रवाई हुई है.
पांच के खिलाफ केस दर्ज
क्लेमनटाउन थाने में तृप्ति और उसकी मां उमा देवी को आरोपी बनाया गया है. दोनों ने मिलकर फर्जी दस्तावेज बनाकर प्रमाण-पत्र हासिल करने का प्रयास किया. रायपुर थाने में कंडोली निवासी खुशी, परी और स्वाति के नाम शामिल हैं. इन तीनों ने फर्जी दस्तावेज और आधार कार्ड अपलोड कर आवेदन किया था. पुलिस को आधार कार्ड के पते भी सही नहीं मिले.
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एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने बताया कि राजस्व विभाग ने दो मुकदमे दर्ज कराए हैं. आरोपियों की तलाश जारी है. पुलिस को संदेह है कि यह सिर्फ कुछ छात्रों की धोखाधड़ी नहीं, बल्कि किसी संगठित गिरोह का काम हो सकता है. फर्जी पते और प्रमाण-पत्र बनाने में मदद करने वालों की भी जांच चल रही है.
इसके अलावा एससी-एसटी कोटे की सीटों की भी जांच शुरू कर दी गई है. अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में सख्ती बरती जाएगी ताकि योग्य छात्रों के हक पर कोई आंच न आए.
मामला गंभीर है क्योंकि सरकारी एमबीबीएस सीटें बहुत कम होती हैं और इन पर योग्य छात्रों का हक बनता है. फर्जी दस्तावेजों से दाखिला लेने वाले छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो रही है. पुलिस आगे और सबूत जुटा रही है.