देहरादून: उत्तराखंड की केदारघाटी एक बार फिर जंगल की आग की चपेट में है. बड़ासू क्षेत्र के पास स्थित केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य के रेल बीट क्षेत्र में लगी आग ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है. पहाड़ी और दुर्गम इलाकों के कारण आग बुझाने में कठिनाइयां सामने आ रही हैं. वन संपदा के साथ-साथ वन्य जीवों के सुरक्षित आवास पर भी संकट खड़ा हो गया है.
केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य के रेल बीट क्षेत्र के जंगलों में फैली आग तेजी से फैलती देखी गई. आग की लपटों ने सूखे पेड़ों और झाड़ियों को अपनी चपेट में ले लिया. इससे लाखों रुपये की वन संपदा नष्ट होने की आशंका जताई जा रही है. वन विभाग के अनुसार आग का प्रभाव ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक पहुंच गया, जिससे हालात और गंभीर हो गए.
केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग ने आग लगने की सूचना मिलते ही मोर्चा संभाल लिया. रेल बीट अनुभाग के प्रभारी गौर सिंह करणी ने बताया कि रविवार सुबह से पांच सदस्यीय दल को आग पर काबू पाने के लिए तैनात किया गया. वन कर्मी लगातार पहाड़ी ढलानों पर पहुंचकर आग को रोकने के प्रयास कर रहे हैं. प्राथमिकता आग को आगे फैलने से रोकने की है.
वन कर्मियों ने बताया कि अधिकांश क्षेत्रों में आग पर नियंत्रण पा लिया गया है, लेकिन चट्टानी और दुर्गम इलाकों में हालात मुश्किल बने हुए हैं. ऐसे क्षेत्रों में न तो पानी आसानी से पहुंचाया जा सकता है और न ही भारी उपकरणों का इस्तेमाल संभव है. तेज हवा के कारण भी आग बार-बार भड़क रही है. अधिकारियों को उम्मीद है कि जल्द हालात काबू में होंगे.
नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क की फूलों की घाटी और गोविंदघाट रेंज में लगी आग के अधिकतर हिस्सों पर नियंत्रण पा लिया गया है. फूलों की घाटी रेंज की वन क्षेत्राधिकारी चेतना कांडपाल ने बताया कि निचले इलाकों में आग बुझाने में वन कर्मियों, मजदूरों और स्थानीय ग्रामीणों ने अहम भूमिका निभाई. अब केवल सीमित क्षेत्रों में निगरानी की जरूरत है.
ज्योतिर्मठ के सामने स्थित चांई गांव के जंगलों में शनिवार शाम को अचानक भीषण आग भड़क उठी थी. आग से गांव के नजदीकी वन क्षेत्र खतरे में आ गए थे. वन कर्मियों और स्थानीय लोगों ने पूरी रात संघर्ष कर रविवार सुबह आग पर काबू पा लिया. समय पर प्रयास नहीं होते तो आग रिहायशी इलाकों तक पहुंच सकती थी.