निर्वाचन आयोग का बड़ा फैसला, उत्तराखंंड के चार पूर्व प्रत्याशियों को मिला तगड़ा झटका; तीन साल तक नहीं लड़ सकेंगे चुनाव
भारत निर्वाचन आयोग ने उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2022 के चार पूर्व प्रत्याशियों को चुनाव खर्च का ब्योरा नहीं देने पर तीन साल के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया है.
देहरादून: भारत निर्वाचन आयोग ने उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2022 में मैदान में उतरे चार पूर्व प्रत्याशियों को बड़ा झटका दिया है. चुनाव खर्च का पूरा ब्योरा निर्धारित समय पर नहीं देने के मामले में आयोग ने चारों को तीन साल की अवधि के लिए चुनाव लड़ने से निरर्हित घोषित किया है. यह रोक आयोग के आदेश की तारीख से प्रभावी होगी.
आयोग के आदेश के मुताबिक अयोग्य घोषित किए गए चारों व्यक्ति अब संसद के किसी भी सदन के लिए चुनाव नहीं लड़ सकेंगे. इसके अलावा वे किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभा अथवा विधान परिषद के सदस्य चुने जाने या बने रहने के लिए भी पात्र नहीं होंगे.
चार पूर्व प्रत्याशियों पर कार्रवाई
निर्वाचन आयोग की ओर से जारी आदेश के अनुसार चकराता विधानसभा क्षेत्र से 2022 का चुनाव लड़ने वाले रामानंद सिंह, धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशी बलबीर कुमार तलवार, राजपुर रोड विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में रहे कमलेश माथुर और ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशी जगजीत सिंह के खिलाफ कार्रवाई की गई है.
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आयोग ने इन चारों प्रत्याशियों को चुनाव के दौरान हुए खर्च का विवरण उपलब्ध नहीं कराने का दोषी माना है. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के तहत आयोग ने उन्हें तीन वर्ष के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया है.
अगले चुनाव पर पड़ेगा असर
आयोग की ओर से लगाई गई यह रोक आदेश जारी होने की तारीख से तीन वर्ष तक लागू रहेगी. इस अवधि में चारों व्यक्ति लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा या विधान परिषद का चुनाव नहीं लड़ सकेंगे.
क्या है प्रक्रिया?
निर्वाचन प्रक्रिया में उम्मीदवारों के चुनाव खर्च का हिसाब देना महत्वपूर्ण माना जाता है. प्रत्याशियों को चुनाव के दौरान किए गए खर्च का निर्धारित तरीके से ब्योरा निर्वाचन अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करना होता है. खर्च का विवरण नहीं देने पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत कार्रवाई का प्रावधान है.
उत्तराखंड में 2022 में विधानसभा चुनाव के दौरान इन चारों प्रत्याशियों ने अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ा था. अब आयोग की कार्रवाई के बाद अगले तीन साल तक इनके चुनावी भविष्य पर रोक लग गई है.