10 मिनट में नौकरी ठुकराई, फिर उसी शख्स को बना दिया HR हेड! वजह जानकर बॉस भी रह गए हैरान

दिल्ली के एंटरप्रेन्योर अभिषेक अग्रवाल ने लिंक्डइन पर एक ऐसे कैंडिडेट की कहानी साझा की है, जिसने जॉइनिंग के दिन सिर्फ 10 मिनट ऑफिस में बिताने के बाद नौकरी करने से मना कर दिया.

Grok
Reepu Kumari

नई दिल्ली: नौकरी की तलाश में ज्यादातर उम्मीदवार कंपनी की सैलरी, पद, सुविधाओं और करियर ग्रोथ को देखकर फैसला लेते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि कोई व्यक्ति नौकरी जॉइन करने के सिर्फ 10 मिनट बाद ही ऑफर ठुकरा दे? दिल्ली के एंटरप्रेन्योर अभिषेक अग्रवाल ने लिंक्डइन पर ऐसा ही एक अनुभव साझा किया है. कैंडिडेट ने ऑफिस में कुछ देर बिताई और वहां का माहौल देखकर साफ कह दिया कि वह यहां काम नहीं करना चाहता.

तीन सप्ताह और चार इंटरव्यू राउंड

मामला इसलिए भी खास बन गया क्योंकि कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. करीब तीन सप्ताह और चार इंटरव्यू राउंड के बाद चुने गए इस कैंडिडेट ने जॉइनिंग के दिन नौकरी छोड़ दी थी. उसने ऑफिस में कर्मचारियों के तनाव और चेहरे पर गायब मुस्कान को इसकी वजह बताया. शुरुआत में अभिषेक को यह बात अजीब लगी, लेकिन बाद में उन्होंने खुद ऑफिस को उसी नजरिए से देखना शुरू किया. इसके बाद उनका फैसला पूरी तरह बदल गया.

जॉइनिंग के दिन कैंडिडेट ने कर दिया साफ इनकार

अभिषेक के मुताबिक, कैंडिडेट के चार इंटरव्यू राउंड हुए थे. बातचीत, वेतन और ऑफर से जुड़ी बातें पूरी हो चुकी थीं. जॉइनिंग वाले दिन वह समय पर ऑफिस पहुंचा और करीब 10 मिनट लॉबी में बैठा. अभिषेक उसका स्वागत करने पहुंचे तो उसने नौकरी शुरू करने से इनकार कर दिया. उसने कहा कि ऑफिस में उसे कुछ ऐसा महसूस हुआ, जिसकी वजह से वह यहां काम नहीं करना चाहता.


कर्मचारियों के चेहरों ने खींचा ध्यान

कैंडिडेट ने अभिषेक से कहा कि उसे ऑफिस का माहौल नकारात्मक लगा. उसके मुताबिक, कर्मचारी तनाव में नजर आ रहे थे और किसी के चेहरे पर मुस्कान नहीं थी. उसने मीटिंग रूम से बाहर निकल रहे एक कर्मचारी का भी जिक्र किया, जो काफी परेशान दिखाई दे रहा था. अपनी बात रखने के बाद उसने अभिषेक को धन्यवाद दिया, हाथ मिलाया और ऑफिस से चला गया. यह फैसला अभिषेक के लिए अप्रत्याशित था.

पहली बार बॉस ने ऑफिस को दूसरे नजरिए से देखा

कैंडिडेट के जाने के बाद अभिषेक अपनी डेस्क पर लौटे, लेकिन उसके शब्द उनके दिमाग में घूमते रहे. उन्होंने ऑफिस को पहली बार उसी नजर से देखना शुरू किया, जिस नजर से वह कैंडिडेट देख रहा था. उन्हें खिड़की के पास सूखे पौधे और खाली कॉमन लॉबी दिखाई दी. कर्मचारी काम में व्यस्त थे, लेकिन ऑफिस में ऊर्जा की कमी महसूस हो रही थी. तब अभिषेक को लगा कि कैंडिडेट की बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

जिस व्यक्ति ने नौकरी छोड़ी, उसी को मिली नई जिम्मेदारी

इसके बाद कहानी ने पूरी तरह अलग मोड़ लिया. अभिषेक ने उसी कैंडिडेट को दोबारा बुलाया. इस बार सवाल नौकरी जॉइन करने का नहीं था. उन्होंने उससे पूछा कि क्या वह ऑफिस के माहौल को बेहतर बनाने में मदद करेगा. कैंडिडेट ने प्रस्ताव स्वीकार किया और कर्मचारियों के अनुभव तथा वर्क कल्चर में सुधार के लिए काम शुरू किया. यानी जिस शख्स ने पहले दिन ऑफिस देखकर नौकरी ठुकराई थी, वही बदलाव की प्रक्रिया का हिस्सा बन गया.

तीन महीने में दिखने लगा बदलाव

अभिषेक के दावे के अनुसार, करीब तीन महीने में ऑफिस के माहौल में बड़ा बदलाव दिखाई दिया. कर्मचारियों की रिटेंशन रेट में 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि कंपनी की बिक्री में करीब 30 प्रतिशत का इजाफा हुआ. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ग्लासडोर पर कंपनी की रेटिंग भी तेजी से बेहतर हुई. करीब एक साल के भीतर उसी कैंडिडेट को चीफ पीपल ऑफिसर यानी CPO के पद पर प्रमोट कर दिया गया.

कहानी ने कंपनियों को भी आईना दिखाया

अभिषेक ने इस अनुभव के जरिए कहा कि हायरिंग सिर्फ कंपनी की तरफ से होने वाली जांच नहीं है. उम्मीदवार भी इंटरव्यू के दौरान कंपनी का माहौल, कर्मचारियों का व्यवहार, मैनेजमेंट और काम करने का तरीका देखता है. उनकी पोस्ट पर कई लोगों ने अपने अनुभव साझा किए. कुछ यूजर्स ने माना कि खराब वर्कप्लेस कल्चर प्रदर्शन और कर्मचारियों के टिके रहने पर असर डाल सकता है. कई लोगों ने यह भी कहा कि ऐसी प्रतिक्रिया मिलने पर कंपनियों को रक्षात्मक होने के बजाय उसे समझने की कोशिश करनी चाहिए.