देहरादून में डिस्लेक्सिया-ऑटिज्म मैपिंग अभियान शुरू, राज्यपाल बोले- बच्चे की परेशानी नहीं, उसकी क्षमता बने पहचान
देहरादून में डिस्लेक्सिया और ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों की पहचान के लिए मैपिंग अभियान शुरू हुआ.
देहरादून के दून संस्कृति स्कूल में मंगलवार को विशिष्ट अधिगम अक्षमता यानी डिस्लेक्सिया और ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों के मैपिंग अभियान की शुरुआत हुई. राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने अभियान शुरू करते हुए कहा कि बच्चों की परेशानी को उनकी पहचान नहीं बनाना चाहिए, उनकी क्षमता को सामने लाना जरूरी है.
बच्चे की क्षमता बने पहचान
राज्यपाल ने कहा कि किसी बच्चे की सीखने या दूसरी परेशानी को उसकी कमी के रूप में नहीं देखना चाहिए. उन्होंने कहा कि बच्चों को दया के बजाय सम्मान, सहारा और अपनी प्रतिभा के मुताबिक आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए. उन्होंने एक ऐसे उत्तराखंड की जरूरत बताई, जहां हर बच्चे को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलें. राज्यपाल ने यह भी कहा कि तकनीक की मदद से दिव्यांग बच्चों को बेहतर सहायता दी जा सकती है. पहाड़ी और दूर के इलाकों में रहने वाले बच्चों तक विशेषज्ञ सेवाएं समय पर पहुंचाने पर भी उन्होंने जोर दिया.
शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल
कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने समावेशी शिक्षा के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे कामों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि प्रदेश के स्कूलों में दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई और सही मार्गदर्शन के लिए 200 विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की गई है. राज्यपाल ने पूर्व सांसद और डिस्लेक्सिया सोसायटी उत्तराखंड के अध्यक्ष तरुण विजय के प्रयासों की भी सराहना की. उन्होंने कहा कि तरुण विजय लंबे समय से हिमालयी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों के जनजातीय बच्चों की शिक्षा के लिए काम कर रहे हैं.
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अंतिम बच्चे तक पहुंचाने का लक्ष्य
तरुण विजय ने कहा कि अभियान का मकसद प्रदेश के आखिरी बच्चे तक पहचान, उपचार, शिक्षा और पुनर्वास की सुविधा पहुंचाना है. कार्यक्रम में एनआईईपीवीडी के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. सुरेंद्र धालवाल ने विशेष जरूरत वाले बच्चों की पहचान और पढ़ाने के तरीकों पर जानकारी दी. कार्यक्रम के अंत में शिवानी कोटनाला ने अतिथियों, शिक्षकों, अभिभावकों और विशेषज्ञों का आभार जताया. इस मौके पर कई स्कूलों के शिक्षक और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे.