उत्तराखंड में कर्मचारी ट्रांसफर की समय-सीमा में बदलाव, 30 जून तक होंगे तबादले
उत्तराखंड शासन की ओर से स्थानांतरण प्रक्रिया की समय-सीमा बढ़ा दी गई है. शासन की ओर से स्पष्ट कहा गया कि विभाग अब 30 जून तक स्थानांतरण आदेश जारी कर सकेंगे.
देहरादून: उत्तराखंड शासन ने वार्षिक स्थानांतरण प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. अब विभाग 30 जून 2026 तक वार्षिक स्थानांतरण पूरे कर सकेंगे. शासन ने 10 जून की समय-सीमा को बढ़ाकर 30 जून कर दिया गया है.
अपर सचिव कार्मिक गिरधारी सिंह रावत द्वारा मंगलवार को जारी आदेश के अनुसार, स्थानांतरण संबंधी कार्यवाहियों में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए यह छूट दी गई है. शासन ने स्पष्ट किया है कि सभी विभाग अब 30 जून तक स्थानांतरण आदेश जारी कर सकेंगे.
विभागीय स्तर पर ही निस्तारण
शासन ने विभागों को और अधिक अधिकार देते हुए निर्देश जारी किए हैं कि बीमारी एवं अनुरोध के आधार पर होने वाले स्थानांतरण के प्रकरण अब विभागीय स्तर पर ही निपटाए जाएं. केवल वे मामले शासन स्तर पर भेजे जाएंगे, जिनमें विभागीय स्तर पर निर्णय नहीं हो पा रहा हो. इससे पहले विभागों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर ही ऐसे प्रकरण निस्तारित करने थे. अब अतिरिक्त समय मिलने से प्रक्रिया और अधिक सुव्यवस्थित हो सकेगी.
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कई विभागों ने समय-सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया था, जिसे शासन ने स्वीकार कर लिया है. यह निर्णय उन कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत साबित होगा जिनकी बीमारी या पारिवारिक कारणों से स्थानांतरण की मांग लंबित थी. विभाग अब अपने स्तर पर इन मामलों का शीघ्र निपटारा कर सकेंगे. कार्मिक विभाग का मानना है कि समय-सीमा बढ़ाने से स्थानांतरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी और अनावश्यक शासन स्तर पर मामलों का बोझ भी कम होगा. इससे प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ने की उम्मीद है.
प्रक्रिया कैसी होगी?
विभागों को अब स्थानांतरण के लिए प्राप्त आवेदनों की जांच, पात्रता का सत्यापन और आवश्यक अनुमोदन की प्रक्रिया 30 जून तक पूरी करनी होगी. शासन ने साफ किया है कि सभी कार्यवाहियां नियमों के अनुसार ही की जाएंगी. यह कदम उत्तराखंड सरकार की प्रशासन को और अधिक प्रभावी एवं संवेदनशील बनाएगा. विशेषकर चिकित्सा, शिक्षा, पुलिस और वन विभाग जैसे बड़े विभागों में जहां स्थानांतरण की संख्या अधिक होती है, इस फैसले से प्रक्रिया आसान हो जाएगी. कर्मचारी संगठनों की ओर से भी इस निर्णय का स्वागत किया गया. उनका कहना है कि अतिरिक्त समय मिलने से जल्दबाजी में गलत निर्णय होने की संभावना कम होगी और कर्मचारियों की वैध समस्याओं का बेहतर समाधान हो सकेगा.