उत्तराखंड में चार साल से कम उम्र के बच्चों की कफ-कोल्ड दवाओं पर सख्ती, जांच के आदेश
चार साल से कम उम्र के बच्चों को दी जाने वाली क्लोरफेनिरामाइन मैलेट और फिनाइलएफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड के संयोजन वाली कफ-कोल्ड दवाओं पर केंद्र सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया है. इसके बाद उत्तराखंड में भी इन दवाओं के उत्पादन, भंडारण और बिक्री की जांच शुरू की जाएगी.
छोटे बच्चों को सर्दी-जुकाम और खांसी में दी जाने वाली कुछ दवाओं को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाया है. क्लोरफेनिरामाइन मैलेट और फिनाइलएफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड के संयोजन वाली सभी फिक्स्ड डोज कांबिनेशन दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर रोक लगा दी गई है.
इसके साथ ही इन दवाओं के पैकेट और लेबल पर यह स्पष्ट चेतावनी देना भी जरूरी कर दिया गया है कि चार साल से कम उम्र के बच्चों को इनका इस्तेमाल नहीं कराया जाए. केंद्र के इस निर्णय के बाद उत्तराखंड में भी संबंधित दवाओं की उपलब्धता और भंडार की जांच की जाएगी.
हरिद्वार, सेलाकुई और रुड़की पर नजर
उत्तराखंड में दवा उत्पादन के प्रमुख केंद्रों को देखते हुए जांच का दायरा व्यापक रखा जाएगा. हरिद्वार, सेलाकुई और रुड़की प्रदेश के प्रमुख फार्मा उत्पादन क्षेत्र हैं. ऐसे में यह पता लगाया जाएगा कि प्रतिबंधित संयोजन वाली दवाओं का उत्पादन कहीं इन क्षेत्रों में तो नहीं हो रहा है.
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स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने ड्रग कंट्रोल विभाग को इस संबंध में जरूरी जानकारी जुटाने के निर्देश दिए हैं. विभाग यह भी जांच करेगा कि कंपनियों के पास इन दवाओं का कितना तैयार माल मौजूद है और कितना स्टाक पहले ही थोक विक्रेताओं तथा मेडिकल स्टोर तक पहुंच चुका है.
मेडिकल स्टोरों पर भी होगी जांच
स्वास्थ्य विभाग कंपनियों से उत्पादन और स्टाक का पूरा ब्योरा लेगा. इसके बाद मेडिकल स्टोरों और अन्य बिक्री केंद्रों पर भी जांच की जाएगी. यदि कहीं प्रतिबंध के बावजूद इन दवाओं की बिक्री या वितरण पाया जाता है तो संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रतिबंधित दवाएं चार साल से कम उम्र के बच्चों तक न पहुंचें और बाजार में मौजूद पुराने स्टाक की भी निगरानी की जा सके.
चार साल से कम उम्र के बच्चों में इन दवाओं को लेकर मुख्य चिंता उम्र के अनुसार इनके प्रभाव और संभावित जोखिम से जुड़ी है. छोटे बच्चों का शरीर दवाओं के प्रति अलग तरह से प्रतिक्रिया कर सकता है. इसी वजह से सरकार ने इस आयु वर्ग में इनके इस्तेमाल को रोकने और बाजार में इनकी उपलब्धता पर निगरानी बढ़ाने का फैसला किया है.