राखी की परंपरा की शुरुआत कहां से हुई? पढ़ें रानी कर्णावती और इंद्र-इंद्राणी की कहानी
क्या आप जानते हैं कि राखी बांधने की यह परंपरा कहां से शुरू हुई? इतिहास और पौराणिक कथाओं में इसकी जड़ें मिलती हैं. आइए आसान भाषा में जानते हैं राखी की परंपरा से जुड़ी दो प्रमुख कहानियां.
Rakhi Tradition Origin: रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्यार और सुरक्षा का प्रतीक है. इस दिन बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि राखी बांधने की यह परंपरा कहां से शुरू हुई? इतिहास और पौराणिक कथाओं में इसकी जड़ें मिलती हैं. आइए आसान भाषा में जानते हैं राखी की परंपरा से जुड़ी दो प्रमुख कहानियां.
रानी कर्णावती और हुमायूं की कहानी:
एक समय राजपूत और मुस्लिम शासकों के बीच संघर्ष चल रहा था. मेवाड़ के राणा सांगा की मृत्यु के बाद रानी कर्णावती ने राज्य की कमान संभाली. तभी गुजरात के बहादुर शाह ने मेवाड़ पर हमला बोल दिया. रानी के पास पर्याप्त सेना नहीं थी. उन्होंने मुगल सम्राट हुमायूं को राखी भेजकर मदद मांगी. हुमायूं उस समय खुद एक युद्ध में व्यस्त थे, लेकिन रानी की राखी ने उनके दिल को छू लिया. उन्होंने तुरंत अपनी सेना मेवाड़ भेज दी. दुर्भाग्य से हुमायूं के सैनिक समय पर नहीं पहुंच सके और चित्तौड़ में राजपूत सेना हार गई.
रानी कर्णावती ने अपने सम्मान की रक्षा के लिए जौहर कर लिया. बाद में हुमायूं की सेना ने बहादुर शाह को चित्तौड़ से खदेड़ा और रानी के पुत्र विक्रमजीत को गद्दी सौंप दी. इस तरह हुमायूं ने राखी का मान रखा. यह कहानी भाई-बहन के रिश्ते से आगे बढ़कर सुरक्षा और सम्मान का प्रतीक बन गई.
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देवराज इंद्र और इंद्राणी की राखी:
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार दैत्य वृत्रासुर ने स्वर्ग पर हमला कर दिया. वह बहुत शक्तिशाली था. देवराज इंद्र की बहन इंद्राणी ने अपने तपोबल से एक रक्षासूत्र तैयार किया और उसे इंद्र की कलाई पर बांध दिया. इस रक्षासूत्र की शक्ति से इंद्र की रक्षा हुई और वे युद्ध में विजयी हुए. कहा जाता है कि तभी से बहनें अपने भाइयों की रक्षा के लिए उनकी कलाई पर राखी बांधने लगीं.