विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया. उन्होंने कहा कि बाल श्रम के खिलाफ लड़ाई केवल कानून और प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें पूरे समाज की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है. मुख्यमंत्री ने कहा कि हर बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर भविष्य का अधिकार है. ऐसे में यह सुनिश्चित करना हम सभी की जिम्मेदारी है कि कोई भी बच्चा मजदूरी करने के लिए मजबूर न हो.
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड सरकार बाल श्रम उन्मूलन के लिए लगातार अभियान चला रही है. इस अभियान के तहत उन बच्चों की पहचान की जा रही है जो किसी न किसी रूप में श्रम कार्यों में लगे हुए हैं. सरकार का उद्देश्य ऐसे बच्चों को श्रम के दुष्चक्र से बाहर निकालकर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है. इसके लिए विभिन्न विभागों के सहयोग से विशेष अभियान संचालित किए जा रहे हैं.
बाल श्रम के विरुद्ध लड़ाई केवल कानून की नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) June 12, 2026
उत्तराखंड में बाल श्रम से मुक्ति हेतु व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत बाल श्रम में संलिप्त बच्चों को चिन्हित कर उन्हें श्रम के दुष्चक्र से बाहर निकालते हुए शिक्षा की मुख्यधारा से… pic.twitter.com/Y0gXIyhZCF
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति उसके बच्चों के भविष्य पर निर्भर करती है. यदि बच्चों को शिक्षा और अवसर मिलेंगे तो वे अपने सपनों को साकार कर सकेंगे. उन्होंने कहा कि बच्चों के हाथों में मजदूरी के औजार नहीं बल्कि किताबें होनी चाहिए. शिक्षा ही वह माध्यम है जो बच्चों को गरीबी और शोषण के चक्र से बाहर निकाल सकती है. मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर समाज की जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि बाल श्रम को समाप्त करने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं.
यदि समाज जागरूक होगा और बाल श्रम के मामलों की जानकारी समय पर प्रशासन तक पहुंचाएगा तो इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है. उन्होंने नागरिकों से संवेदनशील और जिम्मेदार भूमिका निभाने की अपील की.
मुख्यमंत्री धामी ने लोगों से आग्रह किया कि यदि उन्हें अपने आसपास, किसी दुकान, होटल, फैक्ट्री या अन्य कार्यस्थल पर कोई बच्चा श्रम करता दिखाई दे तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस या संबंधित प्रशासनिक विभाग को दें. उन्होंने कहा कि समय पर दी गई जानकारी किसी बच्चे का भविष्य बदल सकती है और उसे शिक्षा तथा सुरक्षित जीवन की ओर वापस ले जा सकती है.