उत्तराखंड की फूलों की घाटी में उमड़ रहे पर्यटक, रंग-बिरंगे फूलों से सजी वादी बनी प्रकृति प्रेमियों की पहली पसंद

उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी इन दिनों प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है. हिमालय की गोद में बसी यह अद्भुत घाटी रंग बिरंगे फूलों की चादर ओढ़कर पर्यटकों का स्वागत कर रही है.

Pinterest
Meenu Singh

गोपेश्वर: उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी इन दिनों प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है. हिमालय की गोद में बसी यह अद्भुत घाटी रंग बिरंगे फूलों की चादर ओढ़कर पर्यटकों का स्वागत कर रही है. हर दिन बड़ी संख्या में देश विदेश से पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले रहे हैं. इस वर्ष अब तक हजारों सैलानी घाटी का दीदार कर चुके हैं, जिससे पर्यटन गतिविधियों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल रही है.

चमोली जिले में स्थित फूलों की घाटी हर वर्ष 1 जून से 31 अक्टूबर तक पर्यटकों के लिए खुली रहती है. सर्दियों के दौरान यह पूरा क्षेत्र बर्फ से ढका रहता है, जबकि गर्मियों और मानसून के मौसम में यहां सैकड़ों प्रजातियों के फूल खिल उठते हैं. इस साल अब तक 2,698 भारतीय और 12 विदेशी पर्यटक घाटी पहुंच चुके हैं, जिससे राष्ट्रीय उद्यान प्रशासन को लगभग 4.90 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है.

जैव विविधता का अनमोल खजाना

फूलों की घाटी केवल अपने फूलों के लिए ही नहीं, बल्कि समृद्ध जैव विविधता के लिए भी जानी जाती है. यहां 500 से ज्यादा प्रजातियों के फूल पाए जाते हैं.


साथ ही हिमालयन थार, कस्तूरी मृग और हिम तेंदुआ जैसे दुर्लभ वन्यजीव भी इस क्षेत्र में देखे जा सकते हैं. खास बात यह है कि हर कुछ दिनों में नई प्रजातियों के फूल खिलने से घाटी का रंग और स्वरूप बदलता रहता है.

रोमांचक है घाटी तक का सफर

फूलों की घाटी पहुंचने के लिए पर्यटकों को बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित गोविंदघाट से घांघरिया तक लगभग 10 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी होती है. इसके बाद तीन किलोमीटर और पैदल चलकर घाटी तक पहुंचा जाता है. करीब 87.5 वर्ग किलोमीटर में फैली इस घाटी में पर्यटकों को शाम तक वापस लौटना अनिवार्य होता है और यहां रात में ठहरने की अनुमति नहीं है.

इन फूलों से महक रही है घाटी

इन दिनों घाटी में प्रिम्युला डेंटिकुलाटा, कोबरा लिली, रोडोडेंड्रोन, वियोला बाइफ्लोरा, मार्श मैरीगोल्ड, लिलियम ऑक्सीपेटलम और अर्नेबिया बेंथमी समेत 20 से अधिक प्रजातियों के आकर्षक फूल खिले हुए हैं, जो पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं.

इतिहास और प्रवेश शुल्क

फूलों की घाटी को वर्ष 1982 में राष्ट्रीय उद्यान और 2005 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मिला था. इसकी खोज ब्रिटिश पर्वतारोही फ्रैंक स्माइथ ने 1931 में की थी. घाटी में प्रवेश के लिए भारतीय पर्यटकों से 200 रुपये, विद्यार्थियों और 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों से 100 रुपये तथा विदेशी पर्यटकों से 800 रुपये शुल्क लिया जाता है.