बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने राष्ट्रीय संगठन की नई टीम का ऐलान कर दिया है. इसमें उत्तराखंड की मजबूत मौजूदगी दिखाई दी है. पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है. अनिल बलूनी को मीडिया, महेंद्र पांडे को केंद्रीय कार्यालय और आलोक भट्ट को सोशल मीडिया से जुड़ी जिम्मेदारी मिली है.
पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को बीजेपी की राष्ट्रीय टीम में उपाध्यक्ष बनाया गया है. रावत पहले भी पार्टी के केंद्रीय संगठन में जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. नई नियुक्ति के बाद राष्ट्रीय स्तर पर उनकी भूमिका एक बार फिर महत्वपूर्ण हो गई है. उत्तराखंड की राजनीति में सक्रिय रहने वाले रावत को संगठन में यह जिम्मेदारी ऐसे समय मिली है, जब राज्य में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने वाली हैं. पार्टी के लिए उनका अनुभव संगठनात्मक कामकाज में उपयोगी माना जा रहा है.
गढ़वाल से सांसद अनिल बलूनी को राष्ट्रीय मीडिया संयोजक बनाया गया है. पार्टी के मीडिया और संचार तंत्र से उनका जुड़ाव पहले से रहा है, इसलिए नई जिम्मेदारी को उनके अनुभव के अनुरूप देखा जा रहा है. राष्ट्रीय मीडिया संयोजक के तौर पर बलूनी पार्टी की नीतियों और कार्यक्रमों को मीडिया तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएंगे. वहीं महेंद्र पांडे को राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री बनाया गया है. यह पद बीजेपी के केंद्रीय कार्यालय और संगठन से जुड़े रोजमर्रा के कामकाज में महत्वपूर्ण माना जाता है.
आलोक भट्ट को राष्ट्रीय सोशल मीडिया सह-संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है. पार्टी के डिजिटल विस्तार को देखते हुए यह पद खासा महत्वपूर्ण हो गया है. सोशल मीडिया के जरिए संगठन अपनी गतिविधियों और राजनीतिक संदेशों को सीधे लोगों तक पहुंचाता है.
ऐसे में भट्ट की भूमिका पार्टी के डिजिटल अभियानों को आगे बढ़ाने और संगठन की ऑनलाइन मौजूदगी मजबूत करने में होगी. इसके अलावा उत्तराखंड की सह प्रभारी रेखा वर्मा को भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है, जिससे केंद्रीय संगठन में राज्य से जुड़े नेताओं की मौजूदगी और बढ़ी है.
नई टीम में उत्तराखंड प्रभारी और राष्ट्रीय महामंत्री दुष्यंत कुमार गौतम को जगह नहीं मिली है. हाल के दिनों में अंकिता भंडारी मामले से जुड़े एक कथित ‘वीआईपी’ को लेकर सोशल मीडिया पर उनका नाम सामने आया था. गौतम ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए राजनीतिक साजिश करार दिया था.
अब नई टीम में उनकी अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं. दूसरी ओर, 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड के कई नेताओं को केंद्रीय संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलना राज्य के लिए पार्टी की रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है.