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कुछ सेकंड दूर थी मौत, हिमालय पर बर्फीले तूफान के बीच फंसी 18 लोगों की टीम; फिर ऐसे बची जान

उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में ट्रेल पास अभियान पर निकले 18 पर्वतारोही अचानक आए हिमस्खलन में फंस गए. सूझबूझ और अनुभव के दम पर पूरी टीम सुरक्षित बच निकली. घटना का वीडियो भी सामने आया है.

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Kanhaiya Kumar Jha

देहरादून: हिमालय की ऊंची चोटियां जितनी आकर्षक दिखाई देती हैं, उतनी ही चुनौतीपूर्ण और खतरनाक भी होती हैं. इसका ताजा उदाहरण उत्तराखंड के पिथौरागढ़ के पास देखने को मिला, जहां ट्रेल पास अभियान पर निकले 18 पर्वतारोहियों का दल अचानक आए हिमस्खलन की चपेट में आते-आते बच गया. कुछ पल के लिए पूरी टीम की जान पर बन आई थी. बाद में सुरक्षित लौटे पर्वतारोहियों ने इस भयावह घटना का वीडियो साझा किया, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया.

पर्वतारोहियों का यह अभियान 30 मई को बागेश्वर जिले के खाती गांव से शुरू हुआ था. करीब 87 किलोमीटर लंबे इस ट्रेक का लक्ष्य पिंडारी और लास्पा घाटी को जोड़ने वाले कठिन ट्रेल पास को पार करना था. दल में कुल 18 सदस्य शामिल थे, जिनमें पश्चिम बंगाल के आठ पर्वतारोही भी थे. कई दिनों की यात्रा के बाद टीम ऊंचाई वाले इलाके में पहुंची.

अचानक बदला मौसम का मिजाज

दल के लीडर दिनेश दानू के अनुसार सात जून को टीम नंदा खाट और पिंडारी ग्लेशियर के बीच कैंप-2 में थी. अगले चरण की तैयारी के तहत पांच सदस्य नीचे की ओर रस्सी लगाने निकले थे. इसी दौरान मौसम ने अचानक करवट ली और देखते ही देखते ऊपर से बर्फ का विशाल गुबार तेजी से नीचे आने लगा.


चीखों से गूंज उठा ग्लेशियर

पर्वतारोहियों द्वारा साझा किए गए वीडियो में भय और अफरा-तफरी साफ दिखाई देती है. बर्फीले तूफान के बीच टीम के सदस्य एक-दूसरे को चेतावनी देते सुनाई दे रहे हैं. 'भागो, ऊपर से एवलांच आ रहा है' जैसी आवाजें पूरे इलाके में गूंज रही थीं. कुछ ही सेकंड में शांत दिखाई देने वाला ग्लेशियर खतरनाक रूप ले चुका था.

महिला सदस्य की जान पर बन आई

हंगामे के बीच टीम की सदस्य सुचित्रा का पैर फिसल गया और वह ढलान की ओर तेजी से खिसकने लगीं. उस समय स्थिति बेहद गंभीर थी. हालांकि टीम के एक सदस्य ने तत्काल साहस और सतर्कता दिखाते हुए अपने पैर के सहारे उन्हें रोक लिया. इस त्वरित प्रतिक्रिया ने एक बड़ा हादसा टाल दिया.

सुरक्षित लौटने पर मिली राहत

हिमस्खलन से बचने के बाद दल ने आगे बढ़ने के बजाय सुरक्षित वापसी का फैसला किया. टीम मर्तोली गांव होते हुए मुनस्यारी पहुंची, जहां सभी सदस्यों ने राहत की सांस ली. पर्वतारोहियों का कहना है कि उस दिन जो कुछ हुआ, उसे याद कर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं. उनके अनुसार सुरक्षित लौटना किसी चमत्कार से कम नहीं था.