'जेल में टूट चुका था हौसला...', इस भारतीय क्रिकेटर का छलका दर्द, गर्लफ्रेंड के प्यार ने बचाई जिंदगी
भारतीय क्रिकेटर एस. श्रीसंत ने अपने जीवन के सबसे कठिन दौर को याद करते हुए बताया कि जेल, विवाद और करियर संकट के बीच उनकी पत्नी भुवनेश्वरी का साथ ही उन्हें टूटने और हार मानने से बचा सका.
S Sreesanth love story: भारतीय क्रिकेटर एस. श्रीसंत की जिंदगी उतार-चढ़ाव से भरी रही है. स्पॉट फिक्सिंग विवाद के बाद उनका करियर संकट में आ गया था. हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने उस मुश्किल समय को याद किया और बताया कि कैसे उनकी पत्नी भुवनेश्वरी उनके लिए सबसे बड़ी ताकत बनीं.
मुश्किल दौर में मिला जीवन का सहारा
साल 2013 का स्पॉट फिक्सिंग मामला श्रीसंत के करियर का सबसे कठिन अध्याय साबित हुआ. गिरफ्तारी, प्रतिबंध और लगातार उठते सवालों ने उन्हें मानसिक रूप से काफी प्रभावित किया. उन्होंने बताया कि जेल में बिताए गए दिन बेहद कठिन थे और कई बार उनके मन में हार मानने जैसे विचार भी आए. ऐसे समय में उनकी प्रेमिका और बाद में पत्नी बनीं भुवनेश्वरी ने उनका हौसला बढ़ाया. श्रीसंत ने कहा कि उन्होंने भुवनेश्वरी से किए गए वादे को याद रखा और वही उन्हें आगे बढ़ने की ताकत देता रहा. उनके अनुसार, अगर परिवार और भुवनेश्वरी का साथ नहीं होता तो हालात और भी मुश्किल हो सकते थे.
प्यार से शादी तक का सफर
श्रीसंत ने अपनी प्रेम कहानी के कई दिलचस्प पहलुओं को भी साझा किया. उन्होंने बताया कि पहली मुलाकात एक स्कूल कार्यक्रम में हुई थी. इसके बाद अलग-अलग मौकों पर दोनों की मुलाकातें होती रहीं और समय के साथ रिश्ता मजबूत होता गया. खास बात यह रही कि जब वह कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे और मुश्किल दौर से गुजर रहे थे, तब भी भुवनेश्वरी और उनका परिवार उनके साथ खड़ा रहा. जेल से जमानत मिलने के बाद दोनों परिवारों ने रोका समारोह किया. श्रीसंत ने कहा कि यह उनके जीवन के सबसे यादगार पलों में से एक था और उसी समय उन्हें महसूस हुआ कि सच्चा साथ क्या होता है.
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विवादों के बाद भी नहीं टूटा हौसला
स्पॉट फिक्सिंग विवाद से पहले भी श्रीसंत स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ चुके थे. एक गंभीर चोट के कारण उनके करियर पर खतरा मंडरा रहा था. डॉक्टरों ने उन्हें भविष्य को लेकर सावधान किया था लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. बाद में कानूनी लड़ाई के बाद उन्हें राहत मिली और उन्होंने घरेलू क्रिकेट में वापसी भी की. हालांकि उन्होंने 2022 में क्रिकेट को अलविदा कह दिया लेकिन उनकी कहानी आज भी संघर्ष और हिम्मत की मिसाल मानी जाती है. श्रीसंत का मानना है कि मुश्किल समय में परिवार और अपनों का साथ इंसान को फिर से खड़ा होने की ताकत देता है.