भारी बारिश के बाद अलकनंदा और मंदाकिनी उफान पर, रुद्रप्रयाग में अलर्ट जारी; IMD ने जारी की चेतावनी

उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश के कारण अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों का जलस्तर बढ़ गया है. प्रशासन हाई अलर्ट पर है, जबकि मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है.

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Sagar Bhardwaj

उत्तराखंड में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है और लगातार हो रही बारिश ने कई जिलों में चिंता बढ़ा दी है. रुद्रप्रयाग जिले में अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिसे देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है. मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. प्रशासन का कहना है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव के कदम उठाए जाएंगे.

 नदियों के बढ़ते जलस्तर पर प्रशासन की पैनी नजर

लगातार बारिश के कारण ऊपरी हिमालयी क्षेत्रों से नदियों में पानी का बहाव बढ़ गया है. अधिकारियों के अनुसार, अलकनंदा नदी का जलस्तर मंगलवार के मुकाबले बुधवार को बढ़कर 622.5 मीटर तक पहुंच गया. प्रशासन ने बताया कि चेतावनी स्तर 626 मीटर और खतरे का स्तर 627 मीटर निर्धारित किया गया है. फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए जिला आपदा नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे निगरानी कर रहा है. अधिकारियों का कहना है कि हालात बदलने पर तुरंत स्थानीय स्तर पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.


 चार दिन तक भारी बारिश की चेतावनी

देहरादून स्थित भारत मौसम विज्ञान विभाग ने रुद्रप्रयाग में 4 जुलाई तक भारी बारिश की संभावना जताई है. इसके अलावा नैनीताल, देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल और ऊधम सिंह नगर जिलों के लिए भी ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. लोगों को नदियों, बरसाती नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है. लगातार बारिश के चलते चमोली जिले में बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग और रुद्रप्रयाग में केदारनाथ यात्रा मार्ग पर मलबा और पत्थर गिरने से यातायात भी प्रभावित हुआ है.

 आपदा प्रबंधन की तैयारियों की हुई समीक्षा

मानसून के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में आयोजित प्री-मानसून मॉक ड्रिल की समीक्षा की. यह अभ्यास राज्य के सभी 13 जिलों में किया गया, जिसका उद्देश्य मानसून से जुड़ी आपदाओं से निपटने की तैयारियों को मजबूत करना, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाना और आपदा प्रतिक्रिया तंत्र की प्रभावशीलता का आकलन करना था. प्रशासन ने श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने तथा मौसम संबंधी आधिकारिक सूचनाओं पर लगातार नजर रखने की अपील की.