निहंग सिख कौन हैं? जानिए 'गुरु की लाडली फौज' का गौरवशाली इतिहास और उत्तराखंड से जुड़ा खास रिश्ता
कर्णप्रयाग में पार्किंग को लेकर व्यापारियों से हुए विवाद ने निहंगों को चर्चा में ला दिया. हेमकुंड साहिब से जुड़े इस घटनाक्रम ने लोगों की जिज्ञासा बढ़ा दी है कि आखिर निहंग सिख कौन हैं और उनका इतिहास क्या है.
उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित हेमकुंड साहिब सिख श्रद्धालुओं की सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में गिना जाता है. हाल ही में कर्णप्रयाग में पार्किंग विवाद के बाद निहंग सिखों और स्थानीय व्यापारियों के बीच हुए टकराव ने पूरे मामले को सुर्खियों में ला दिया. इसके बाद कुछ निहंगों की गिरफ्तारी हुई, जबकि विरोध के रूप में नगरासू गुरुद्वारे में डेरा डालने और पंजाब से आने वाले निहंगों को हिमाचल सीमा पर रोकने की घटनाओं ने इस समुदाय को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है.
कौन होते हैं निहंग सिख?
निहंग सिख, सिख परंपरा का एक विशिष्ट योद्धा समुदाय माना जाता है, जिसे सम्मानपूर्वक 'गुरु की लाडली फौज' कहा जाता है. इन्हें अकाली भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है ऐसा व्यक्ति जो केवल परमात्मा को ही अपना सर्वोच्च मानता हो. नीले रंग के विशेष वस्त्र, ऊंची दस्तार और पारंपरिक शस्त्र धारण करना उनकी पहचान मानी जाती है. तलवार, भाला और अन्य पारंपरिक हथियार उनके जीवन का हिस्सा रहे हैं. निहंग सिख युद्ध कौशल का नियमित अभ्यास करते हैं और धार्मिक परंपराओं के साथ वीरता की विरासत को आज भी जीवित रखते हैं.
नाम की उत्पत्ति और अलग पहचान
'निहंग' शब्द की उत्पत्ति को लेकर अलग-अलग मत हैं. एक मत के अनुसार यह फारसी भाषा से आया है, जिसका संबंध तलवार या मगरमच्छ से माना जाता है. वहीं कुछ विद्वान इसे संस्कृत के 'निशंक' शब्द से जोड़ते हैं, जिसका अर्थ निडर और निर्भय होता है. निहंग समुदाय मुख्य रूप से ब्रह्मचारी और गृहस्थ दो वर्गों में विभाजित माना जाता है. इनके प्रमुख दलों में बुड्ढा दल, तरना दल और बिधीचंद दल शामिल हैं. वे नीले रंग का निशान साहिब ध्वज फहराते हैं और अपनी विशिष्ट धार्मिक एवं सैन्य परंपराओं के कारण अन्य सिख समुदायों से अलग पहचान रखते हैं.
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खालसा परंपरा से जुड़ा गौरवशाली इतिहास
इतिहासकारों के अनुसार निहंग सिखों की पहचान खालसा परंपरा से गहराई से जुड़ी हुई है. माना जाता है कि वर्ष 1699 में दसवें सिख गुरु, गुरु गोविंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना के साथ इस योद्धा परंपरा को संगठित स्वरूप दिया. मुगल काल के दौरान निहंग सिख अपनी वीरता, युद्ध कौशल और गुरिल्ला रणनीतियों के लिए प्रसिद्ध रहे. सिख साम्राज्य के दौर में भी उन्होंने सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. कठिन परिस्थितियों में धर्म और समाज की रक्षा के लिए उनका योगदान इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है.