'बाबा ने बुलाया है', बुर्का पहनकर खाटू श्याम मंदिर पहुंची महिला, आरती में हुई शामिल
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में एक अनोखी घटना चर्चा का विषय बन गई है. बुर्का पहनकर एक महिला खाटू श्याम मंदिर पहुंची और संध्या आरती में शामिल हुई. मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं के बीच खड़ी होकर महिला ने हाथ जोड़कर पूजा-अर्चना की.
शाहजहांपुर शहर के बरेली मोड़ स्थित खाटू श्याम मंदिर में सोमवार शाम एक ऐसी घटना देखने को मिली, जिसने वहां मौजूद श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. रोजाना की तरह मंदिर में संध्या आरती चल रही थी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के दर्शन एवं पूजा-अर्चना के लिए मौजूद थे.
इसी दौरान बुर्का पहने एक महिला मंदिर परिसर में पहुंची और अन्य भक्तों के साथ आरती में शामिल हो गई. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार महिला करीब 15 मिनट तक मंदिर में रही और पूरी श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करती दिखाई दी. हालांकि इंडिया डेली इसकी पुष्टि नहीं करता है.
श्रद्धालुओं के बीच खड़ी होकर की पूजा
मंदिर में मौजूद भक्त जहां हाथ जोड़कर भगवान खाटू श्याम की आराधना कर रहे थे, वहीं महिला भी श्रद्धालुओं की कतार में खड़ी हो गई. वीडियो में देखा जा सकता है कि वह मंदिर के फर्श पर बिछी मैट पर अन्य भक्तों के साथ हाथ जोड़कर खड़ी है. उसके हाथ में नीले रंग की प्रसाद की टोकरी भी दिखाई दे रही है.
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आरती के दौरान महिला पूरी तरह से धार्मिक अनुष्ठान में शामिल नजर आई. इससे कई श्रद्धालु आश्चर्यचकित भी हुए, लेकिन किसी ने उसे पूजा करने से नहीं रोका. आरती के दौरान एक युवक की नजर महिला पर पड़ी. उसने महिला से बातचीत करते हुए पूछा कि वह मंदिर में कैसे पहुंची और बाबा की भक्त कैसे बन गई. इस पर महिला ने सहजता से जवाब दिया कि बाबा ने बुलाया, इसलिए आ गई.
सोशल मीडिया पर चर्चा तेज
आरती समाप्त होने के बाद महिला शांतिपूर्वक मंदिर से निकल गई और अपने घर लौट गई. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वह किस उद्देश्य से मंदिर पहुंची थी या वह नियमित रूप से वहां आती है या नहीं. घटना सोमवार की बताई जा रही है, लेकिन इसका वीडियो बुधवार को सामने आया.
वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है और लोग इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत किया जाता है और आस्था का सम्मान सबसे महत्वपूर्ण है. वहीं कुछ लोग इस घटना को धार्मिक सौहार्द और आपसी सम्मान की मिसाल के रूप में भी देख रहे हैं.