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नजूल विधेयक पर UP में मचा है संग्राम, BJP विधायक क्यों कर रहे योगी सरकार के बिल का विरोध? समझिए अंदर की कहानी

Nazul Bill: उत्तर प्रदेश सरकार ने 5 मार्च को विधानसभा में नजूल विधेयक पारित कराया गया था. इस विधेयक को कानून बनाने के लिए इसका विधान मंडल से पास होना जरूरी था. 1 अगस्त को केशव प्रसाद मौर्य ने इस विधेयक को विधान मंडल में पेश किया. विधेयक पेश होते ही यूपी बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने इसे प्रवर समिति को भेजने के लिए मजबूर कर दिया.

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नजूल विधेयक पर UP में मचा है संग्राम, BJP विधायक क्यों कर रहे योगी सरकार के बिल का विरोध? समझिए अंदर की कहानी
Courtesy: Social Media

Nazul Bill: यूपी की योगी सरकार नजूल संपत्ति विधेयक पर गिर गई है. विधानसभा से तो यह विधेयक पारित हो गया था लेकिन विधान परिषद में यह अटक गया. बीजेपी के विधायकों ने ही इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी की सिफारिश करने पर स्पीकर ने इसे प्रवर समिति को भेज दिया गया. 5 मार्च को सरकार ने विधानसभा से इस विधेयक को पारित करा लिया था. राज्यपाल ने भी इस विधेयक को मंजूरी दे दी थी. लेकिन बिल बनाने के लिए इसका विधानसभा से पारित होना जरूरी थी. 1 अगस्त को इसे विधान परिषद में पेश किया गया. लेकिन बीजेपी के धुरंधर नेता ही इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं.

इस विधेयक का विरोध शुरुआत से ही हो रहा है. मार्च में जब यह बिल विधानसभा में लाया गया था तो समाजवादी पार्टी ने इसका विरोध किया था. विपक्ष तो इस विधेयक का विरोध कर ही रहा था लेकिन बीजेपी के विधायक इस बार खुलकर विरोध करने लगे.

सहयोगी दल के साथ अपने ही विधेयक कर रहे हैं विरोध

बीजेपी विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी और पूर्व मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह, एनडीए की सहयोगी निषाद पार्टी और जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने नजूल विधेयक का विरोध किया. विरोध के बावजूद सरकार ने मार्च महीने में इस बिल को विधानसभा से पास करा लिया था.

विधान मंडल में इस विधेयक के पेश होने से पहले ही वहां के सदस्यों ने इस विधेयक के नफा और नुकसान का आंकलन कर लिया था. 1 अगस्त को जैसे ही उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य इस विधेयक को विधान परिषद में पेश किया. उसके तुरंत बाद ही बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने इस बिल को प्रवर समिति के पास भेजने की सिफारिश की. इस सिफारिश को स्पीकर ने मंजूरी दे दी.

नजूल विधेयक से प्रभावित हो सकता है राजनेताओं को वोट बैंक

उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों में कुल 28 हजार हेक्टेयर से ज्यादा की नजूल जमीन है. सबसे ज्यादा नजूल जमीन प्रयागराज में है. इसलिए उसी इलाके से विरोध की आवाज ज्यादा आ रही है. प्रयागराज में करीब 1300 हेक्टेयर नजूल की जमीन है. इस जमीन पर पीढ़ियों से लोग घर बनाकर रह रहे हैं. ऐसे में उस क्षेत्र के राजनेता ये नहीं चाहेंगे कि इस विधेयक की वजह से उनका वोट बैंक प्रभावित हो.

नजूल विधेयक से प्रयागराज में 25 हजार परिवार प्रभावित हो सकते हैं. एक विधेयक का 25 हजार लोगों पर प्रभाव पड़ने का सीधा मतलब वोट बैंक से हैं. इस लिए प्रयागराज और उसके आसपास विधानसभा क्षेत्र के विधायक इस बिल का विरोध अधिक कर रहे हैं.

यूपी में करारी शिकस्त से छिड़ा संग्राम

लोकसभा चुनाव में यूपी में बीजेपी को भारी नुकसान हुआ था. 2019 में 62 सीटें जीतने वाली बीजेपी इस बार 33 सीटों पर ही सिमट गई. इतनी कीटों के चलते बीजेपी बहुमत से दूर थी. इस करारी शिकस्त के बाद से ही यूपी बीजेपी में संग्राम छिड़ा हुआ है. डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और योगी के बीच कलह की खबरें सामने आई थी. केशव प्रसाद मौर्य कई बार कह चुके हैं कि सरकार से बड़ा संगठन होता है. वह अपने इस बयान पर अडिग रहे. अब केशव के सुर से सुर मिलाते हुए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी भी नजर आ रहे हैं. उन्हीं के चलते विधान मंडल में नजूल विधेयक अटक गया.