यूपी की यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के छात्र भी अब यूनिफॉर्म में नजर आएंगे. गुरुवार को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राजभवन में एक समीक्षा बैठक के दौरान यह बड़ा फैसला लिया है. उन्होंने कहा कि छात्रों में ड्रेस कोड लागू करने का सबसे बेहतर असर यह होता है कि छात्रों के बीच अमीरी-गरीबी का भेदभाव मिट जाता है, सब एक जैसे कपड़ों में होते हैं, इससे टीम भावना भी प्रदर्शित होती है. छात्रों के बीच किसी तरह का भेदभाव नहीं होगा तो जाहिर सी बात है कि उनके आत्मीयता बढ़ेगी.
समीक्षा बैठक के दौरान राज्यपाल ने कहा कि शिक्षक की समाज में बड़ी महत्ता है, मान-सम्मान है, शिक्षक कोई भी काम करें तो इस मान-मर्यादा का ध्यान रखें और कोई भी ऐसा काम न करें जिससे गुरु की गरिमा को ठेस पहुंचती हो. टीचर्स रेगुलर और छात्रों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करें. राज्यपाल का यह वक्तव्य बुधवार को लखनऊ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह और बीएससी छात्र के बीच हुई बातचीत का ऑडियो वायरल होने पर माना रहा है. वायरल ऑडियो में पेपर आउट करने और छात्रा को बुलाने जैसी बातें सामने आई थीं और यह प्रकरण उजागर होने के बाद प्रोफेसर को निलंबित कर दिया गया.
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल समीक्षा बैठक में महिला कॉलेजों के हॉस्टल्स की हालत सुधारने और छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी कड़े निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि हर कॉलेज में एक कमेटी का गठन किया जाए, ताकि कमेटी के समक्ष छात्र और छात्राओं अपनी बात खुलकर रख सकें, अपनी परेशानी बता सकें. कमेटी में महिला पुरुष प्रतिनिधित्व का भी ध्यान रखा जाए. छात्राओं की शिकायत सुनते समय कमेटी विशेष एहतियात बरते, मामले की संवेदनशीलता समझे. उन्होंने छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कॉलेज में रोजगार परक कोर्स शुरू कराने भी निर्देश दिए हैं.