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'मस्जिद नहीं कंस का किला है', मलीहाबाद में पासी समाज ने किया दावा; सीएम योगी को लिखा पत्र

लखनऊ के मलीहाबाद में एक मस्जिद और कब्रिस्तान को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. पासी समाज के लोगों ने इसे राजा कंस का किला बताया है और सीएम योगी को जांच कराने के लिए पत्र भी लिखा है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
'मस्जिद नहीं कंस का किला है', मलीहाबाद में पासी समाज ने किया दावा; सीएम योगी को लिखा पत्र
Courtesy: social media

लखनऊ: राजधानी लखनऊ के मलीहाबाद में मस्जिद को लेकर एक नये मामले ने विवाद छेड़ दिया है. दरअसल इस इलाके की एक मस्जिद और कब्रिस्तान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. इस मस्जिद को लेकर पासी समाज ने दावा किया है कि ये कंस का किला था और इसके अंदर पूजा होती थी लेकिन अब इसमें नमाज पढ़ी जाती है.

इसको लेकर समजा के नेता सूरज पासवान ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर मांग की है कि ये उनकी आस्था का मामला है और इसे पुनर्जीवित किया जाना चाहिए. सीएम योगी से इस जगह को वापिस दिलाने की मांग की गई है. साथ इसकी जांच कराने की भी बात कही गई है. वहीं इसको लेकर मुस्लिम समुदाय का बयान भी सामने आया है. उनका कहना है कि सरकारी कागजों में ये मकबरा और मस्जिद है. मौलाना सूफियान ने कहा कि पहले संभल, भोजशाला और अब मलीहाबाद मस्जिद को मंदिर बनाना ट्रेंड बन गया है.

पुराने कागजों में क्या है?

पुराने ब्रिटिश गजेटियर और स्थानीय ऐतिहासिक रिकॉर्ड के मुताबिक माना जाता है कि कस्मांडी गंव का संबंध राजा कंस से है. रिन्हें एक राजपासी शासक बताया जाता है. ऐतिहासिक दस्तावेजों में जिक्र है कि 11वीं सदी के आखिर में  राजा कंस का काकोरी के आस-पास के इलाकों पर राज था और उन्होंने सालार मजूद गाजी की हमलावर सेनाओं के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी. मान्याताओं के अनुसार राजा कंस ने कस्मांडी के पास सासार मसूद के दो सेनापतियों को हराया था.

समाज ने क्या दावा किया है?

पासी समाज का दावा है कि वह पुराना किसा और उसके अंदर बना शिव मंदिर अब अवैध कब्जे में है. उनका आरोप है कि मुसलमान वहां शुक्रवार की नमाज पढ़ते हैं और किले के परिसर के अंदर नई कब्रें बना दी गई हैं. बताया जा रही है कि इमारत के बाहर उर्दू में लिखे साइनबोर्ड भी लगा दिए गए हैं. वहीं मुस्लिम पक्ष इन आरोपों का खारिज करता है.

उनका कहना है कि यह जगह लंबे समय से अनके समुदाय के लिए धार्मिक स्थल के तौर पर जानी जाती है. पुलिस और स्थानीय अधिकारी इलाके में हालातों पर नजर बनाए हुए हैं. इस मामले पर कार्रवाई की मांग तेजी से उठ रही है.