menu-icon
India Daily

UP पंचायत चुनाव में दोबारा वोट डालने वालों की खैर नहीं, पहली बार फर्जी वोटरों पर रहेगी FRS की नजर

उत्तर प्रदेश में होने वाली पंचायत चुनाव की तैयारी तेज हो गई है. चुनाव प्रक्रिया को और भी ज्यादा निष्पक्ष बनाने के लिए आयोग द्वारा इस बार तकनीक का भी सहारा लिया जाएगा.

shanu
Edited By: Shanu Sharma
UP पंचायत चुनाव में दोबारा वोट डालने वालों की खैर नहीं, पहली बार फर्जी वोटरों पर रहेगी FRS की नजर
Courtesy: Pinterest

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बहुप्रतीक्षित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं. राज्य निर्वाचन आयोग ने बुधवार को अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी, जिसमें कुल 12.58 करोड़ मतदाताओं को शामिल किया गया है. इस बार मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान जहां लाखों नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए हैं, वहीं मृतक और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाकर सूची को अधिक सटीक बनाने का प्रयास किया गया है. 

आयोग ने चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया है. राज्य निर्वाचन आयुक्त राज प्रताप सिंह ने अंतिम मतदाता सूची जारी करते हुए बताया कि इस बार पंचायत चुनाव में पहली बार फेस रिकग्निशन सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे फर्जी मतदान पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी.

मतदाता सूची में बढ़े 29 लाख से अधिक नाम

निर्वाचन आयोग के अनुसार वर्ष 2021 की मतदाता सूची में 12.29 करोड़ मतदाता शामिल थे. वर्ष 2025-26 के पुनरीक्षण के बाद यह संख्या बढ़कर 12.58 करोड़ हो गई है. नई सूची तैयार करने के दौरान कुल 2.32 करोड़ नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए, जबकि मृतक, स्थानांतरित और अन्य कारणों से 2.03 करोड़ नाम हटाए गए. इस प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची में कुल 29.01 लाख मतदाताओं की शुद्ध वृद्धि दर्ज की गई है. आयोग का कहना है कि पुनरीक्षण अभियान का उद्देश्य वास्तविक और पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करना तथा अपात्र नामों को हटाना था.

पहली बार जारी हुए स्टेट वोटर नंबर

इस बार की मतदाता सूची की एक और खास बात यह है कि सभी मतदाताओं को पहली बार स्टेट वोटर नंबर (एसवीएन) जारी किए गए हैं. इससे मतदाताओं की पहचान और रिकॉर्ड प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकेगा.निर्वाचन अधिकारियों का मानना है कि एसवीएन प्रणाली भविष्य में चुनावी प्रक्रियाओं को और अधिक पारदर्शी तथा तकनीक आधारित बनाने में सहायक होगी.

आगामी पंचायत चुनाव में फेस रिकग्निशन सिस्टम का उपयोग सबसे महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है. मतदान के दौरान मतदाता की फोटो लेकर उसे डिजिटल रिकॉर्ड से मिलाया जाएगा. यदि कोई व्यक्ति पहले मतदान कर चुका होगा या उसकी पहचान संदिग्ध होगी, तो सिस्टम तत्काल इसकी जानकारी उपलब्ध करा देगा. आयोग का दावा है कि इस तकनीक के प्रयोग से फर्जी मतदान, दोहरे मतदान और पहचान संबंधी अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा. इससे चुनाव की निष्पक्षता और विश्वसनीयता में भी वृद्धि होगी.