दुष्कर्म मामलों में बदले नियम, DGP ने सभी पुलिस अधिकारियों को जारी किए सख्त निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद उत्तर प्रदेश के डीजीपी राजीव कृष्ण ने सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया है कि दुष्कर्म या लैंगिक उत्पीड़न के मामलों में गर्भवती पीड़िता को तुरंत मुख्य चिकित्साधिकारी के समक्ष पेश किया जाए.

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Babli Rautela

उत्तर प्रदेश में दुष्कर्म और लैंगिक उत्पीड़न के मामलों में पीड़िताओं की सुरक्षा और चिकित्सीय सहायता सुनिश्चित करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने नए निर्देश जारी किए हैं. डीजीपी राजीव कृष्ण ने सभी जिलों की पुलिस को आदेश दिया है कि यदि किसी दुष्कर्म या लैंगिक उत्पीड़न की पीड़िता गर्भवती है, तो उसे बिना देरी किए मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) के समक्ष पेश किया जाए.

यह निर्देश इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद जारी किए गए हैं. पुलिस अधिकारियों से कहा गया है कि पीड़िताओं के संरक्षण, चिकित्सा, गर्भसमापन से जुड़े कानूनी अधिकारों और देखभाल से संबंधित सभी प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए.

नाबालिग मामलों में POCSO के दस्तावेज जरूरी

डीजीपी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि यदि पीड़िता नाबालिग है, तो उसे CMO के समक्ष पेश करते समय सभी जरूरी दस्तावेज भी उपलब्ध कराए जाएं.


इनमें शामिल होंगे:

  •  मेडिको-लीगल रिपोर्ट (MLR)
  •  पीड़िता का बयान
  •  एफआईआर की प्रति
  •  लैंगिक हिंसा से संबंधित चिकित्सीय रिपोर्ट
  •  अन्य आवश्यक दस्तावेज

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पीड़िता को समय पर चिकित्सा और कानूनी सहायता मिल सके.

थाना प्रभारी को देनी होगी सूचना

निर्देशों के अनुसार यदि पीड़िता नाबालिग और अविवाहित है, तो संबंधित थाना प्रभारी को तुरंत पुलिस आयुक्त या एसपी को इसकी जानकारी देनी होगी. वरिष्ठ अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि पीड़िता को गर्भसमापन चिकित्सा अधिनियम, 1971 (MTP Act) और POCSO Act के प्रावधानों के अनुसार संबंधित सक्षम प्राधिकरणों के समक्ष समय पर प्रस्तुत किया जाए.

हर कार्रवाई का होगा रिकॉर्ड

डीजीपी ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले में पुलिस द्वारा की गई प्रत्येक कार्रवाई का विवरण जनरल डायरी (GD) में दर्ज करना अनिवार्य होगा. इसके साथ ही संबंधित जिलाधिकारी (DM) और एसएसपी को निर्देश दिए गए हैं कि वे 24 घंटे के भीतर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें और सभी प्रक्रियाओं के अनुपालन की निगरानी करें.

पुलिस मुख्यालय का कहना है कि इन निर्देशों का उद्देश्य दुष्कर्म और लैंगिक उत्पीड़न की पीड़िताओं को समय पर चिकित्सा सुविधा, कानूनी संरक्षण और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है. साथ ही यह सुनिश्चित करना भी है कि ऐसे मामलों में कानून के तहत निर्धारित सभी प्रक्रियाओं का पालन बिना किसी देरी के किया जाए.