लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सरकार लगातार जनकल्याण और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े फैसले ले रही है. इसी क्रम में सोमवार को हुई योगी सरकार की कैबिनेट बैठक में 28 प्रस्ताव पेश किए गए. इनमें अधिकांश प्रस्तावों को मंजूरी मिल गई, लेकिन मदरसा शिक्षकों को ग्रेच्युटी देने वाला प्रस्ताव चर्चा का विषय बन गया. सरकार ने इसे फिलहाल स्वीकार करने के बजाय आगे के लिए स्थगित कर दिया और इसके पीछे अपनी नीति भी स्पष्ट की.
कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कुल 28 प्रस्तावों पर विचार हुआ. इनमें से 27 प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित कर दिए गए. हालांकि सहायता प्राप्त अरबी और फारसी मदरसों के शिक्षकों को ग्रेच्युटी देने वाले प्रस्ताव पर सहमति नहीं बन सकी. सरकार ने इसे तत्काल लागू करने के बजाय फिलहाल रोकने का निर्णय लिया.
सरकार का मानना है कि सहायता प्राप्त मदरसों में किसी भी नई वित्तीय सुविधा से पहले उनकी व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाना जरूरी है. बीते कुछ वर्षों में मदरसों के संचालन, वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक ढांचे की समीक्षा की गई है. ऐसे में सरकार बिना व्यापक सुधार के अतिरिक्त आर्थिक दायित्व लेने के पक्ष में नहीं दिख रही.
राज्य सरकार लगातार मदरसों को आधुनिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है. इसके तहत गणित, विज्ञान, कंप्यूटर और एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने की योजना पर जोर दिया जा रहा है. सरकार का उद्देश्य धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक विषयों को भी समान महत्व देना है.
सरकारी स्तर पर सहायता प्राप्त मदरसों में शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया और सेवा शर्तों की भी समीक्षा जारी है. अधिकारियों का मानना है कि जब तक इन व्यवस्थाओं में आवश्यक सुधार नहीं हो जाते, तब तक ग्रेच्युटी जैसी स्थायी वित्तीय सुविधा लागू करना उचित नहीं होगा. इसलिए प्रस्ताव को फिलहाल स्थगित रखा गया है.
विधानसभा चुनाव से पहले सरकार के हर फैसले पर राजनीतिक और सामाजिक नजर बनी हुई है. मदरसा ग्रेच्युटी प्रस्ताव को टालने के निर्णय को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है. फिलहाल सरकार का कहना है कि पहले शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पारदर्शिता और मानकों को मजबूत किया जाएगा. उसके बाद ही ऐसे प्रस्तावों पर आगे निर्णय लिया जाएगा.