Budget 2026

अब नहीं उतारने होंगे जूते-मोजे, यूपी बोर्ड परीक्षा के नए दिशा-निर्देश जारी; जानें क्या-क्या बदला?

यूपी बोर्ड की 2026 परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं. छात्रों की गरिमा का ध्यान रखते हुए जूते-मोजे उतारने पर रोक लगी है. सीसीटीवी और वॉयस रिकॉर्डर की रोज जांच अनिवार्य है, साथ ही अभद्र व्यवहार पर पाबंदी. कुल 52.30 लाख परीक्षार्थी शामिल होंगे.

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Kanhaiya Kumar Jha

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने बोर्ड परीक्षाओं को पारदर्शी और सम्मानजनक बनाने के लिए नए निर्देश जारी किए हैं. हर साल नकल और अव्यवस्था की शिकायतों को देखते हुए इस बार निगरानी बढ़ाई गई है. छात्रों को असुविधा न हो, इसलिए मुख्य द्वार पर ही जांच होगी. महिला छात्राओं की तलाशी सिर्फ महिला शिक्षिकाएं करेंगी. परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी उपकरणों की दैनिक जांच से नकल पर काबू पाया जाएगा. बाहरी हस्तक्षेप रोकने के लिए मीडिया और फोटोग्राफी पर प्रतिबंध है. अपर मुख्य सचिव ने सभी अधिकारियों को सख्ती बरतने के आदेश दिए हैं.

परीक्षार्थियों को अब जूते या मोजे उतारने की जरूरत नहीं पड़ेगी. पूरी जांच केंद्र के मुख्य द्वार पर होगी, ताकि कक्षा में कोई अपमानजनक स्थिति न बने. यह बदलाव छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए बड़ी राहत है. अभद्र व्यवहार पर सख्त रोक लगाई गई है, और केंद्र व्यवस्थापक इसकी जिम्मेदारी लेंगे.

तकनीकी निगरानी का मजबूत तंत्र

सीसीटीवी कैमरे और वॉयस रिकॉर्डर की रोजाना जांच अनिवार्य है. अगर कोई खराबी मिले, तो तुरंत जिला विद्यालय निरीक्षक को सूचित करना होगा. बिना इन उपकरणों के परीक्षा नहीं होगी. रिकॉर्डिंग कम से कम 30 दिनों तक सुरक्षित रखनी होगी, ताकि कोई बहाना न चले. 

निष्पक्षता सुनिश्चित करने के नियम

जिस विषय की परीक्षा हो, उसके शिक्षकों की ड्यूटी उसी केंद्र पर नहीं लगेगी. बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा. कक्ष निरीक्षक अपने मोबाइल और गैजेट बाहर जमा करेंगे. उत्तर पुस्तिकाओं को सीसीटीवी निगरानी में पैक कर संकलन केंद्र भेजा जाएगा.

संवेदनशील केंद्रों पर विशेष व्यवस्था

संवेदनशील और अतिसंवेदनशील केंद्रों पर सशस्त्र पुलिस तैनात रहेगी. औचक निरीक्षण होंगे, और रिपोर्ट रोजाना जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी. 50 प्रतिशत बाहरी कक्ष निरीक्षकों से जांच कराई जाएगी, ताकि नकल का कोई मौका न मिले.

परीक्षा के आंकड़े और महत्व

प्रदेश में 8033 परीक्षा केंद्र हैं, जहां 52.30 लाख छात्र भाग लेंगे. इनमें हाईस्कूल के 27.50 लाख और इंटरमीडिएट के 24.79 लाख परीक्षार्थी शामिल हैं. सरकार का फोकस तकनीक, अनुशासन और मानवीय दृष्टिकोण पर है, जो परीक्षाओं को भरोसेमंद बनाएगा.