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नहीं मान रहे शंकराचार्य! फिर दिया ऐसा बयान, 40 दिन बाद लखनऊ में धर्म संसद बुलाने का किया ऐलान

प्रयागराज माघ मेले से जुड़े घटनाक्रम के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच टकराव गहराता जा रहा है. अब लखनऊ में धर्म संसद बुलाने और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 40 दिन का अल्टीमेटम देने से यह विवाद और तेज हो गया है.

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Edited By: Babli Rautela
नहीं मान रहे शंकराचार्य! फिर दिया ऐसा बयान, 40 दिन बाद लखनऊ में धर्म संसद बुलाने का किया ऐलान
Courtesy: Instagram

प्रयागराज: माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुई घटना ने उत्तर प्रदेश की राजनीति और संत समाज में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. कई दिनों तक अनशन करने के बाद शंकराचार्य बिना संगम स्नान किए ही मेला छोड़कर लौट आए. इसके बाद से यह मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. काशी पहुंचने के बाद उन्होंने साफ संकेत दे दिए कि यह लड़ाई अब और आगे जाएगी.

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने महाशिवरात्रि से पहले 10 और 11 मार्च को लखनऊ में धर्म संसद बुलाने का ऐलान किया है. उनका कहना है कि इस दौरान देशभर से संत महंत और आचार्य एकत्र होंगे. इसी मंच से यह तय किया जाएगा कि कौन हिंदू है, कौन हिंदू हृदय सम्राट कहलाने योग्य है और किसे नकली हिंदू घोषित किया जाना चाहिए. इस बयान के बाद विवाद सुलझने के बजाय और गहराता दिख रहा है.

शंकराचार्य ने फिर दिया भड़काउ बयान

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें पूरा समर्थन सनातन धर्म से मिल रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि देश के हिंदुओं के साथ बड़ा छल हो रहा है. यह छल खुद को योगी, संत और धर्म का ठेकेदार बताने वाले लोग और उनकी पार्टी कर रही है. शंकराचार्य का कहना है कि अब ऐसे नकली हिंदुओं का पर्दाफाश जरूरी हो गया है.

शंकराचार्य ने इस विवाद को सीधे सरकार से जोड़ते हुए उन्हें खुली चुनौती दे दी है. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश से दुनियाभर में गोमांस की सप्लाई हो रही है. अगर योगी वास्तव में हिंदू हैं तो 40 दिनों के भीतर इसे रोककर दिखाएं. इसी अल्टीमेटम के आधार पर 40 दिन बाद लखनऊ में धर्म संसद बुलाई गई है.

हिंदू होने का प्रमाण मांगने पर मचा बवाल

अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि इतिहास में पहली बार किसी शंकराचार्य से प्रमाण मांगा गया. मुझसे शंकराचार्य होने का प्रमाण पत्र मांगा गया और मैंने प्रमाण दिया. अब वही मापदंड योगी आदित्यनाथ पर भी लागू होना चाहिए. अगर 40 दिनों में गोभक्ति का प्रमाण नहीं दिया गया तो संत समाज लखनऊ में बैठकर निंदा करेगा.

माघ मेला छोड़ने को लेकर शंकराचार्य ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि प्रशासन ने उन्हें लालच दिया कि संगम स्नान करा देंगे और फूल बरसाए जाएंगे. अगले साल चारों शंकराचार्यों के लिए प्रोटोकॉल बनाने का भी प्रस्ताव रखा गया. लेकिन उन्होंने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि पहले उन बटुकों और संन्यासियों से माफी मांगी जाए जिन पर लाठी बरसाई गई थी.

बयान पर संतों और नेताओं का रिएक्शन

शंकराचार्य के बयान पर संत समाज में भी मतभेद सामने आए हैं. स्वामी नारायणाचार्य ने उनके बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वर्ग विशेष को खुश करने के लिए सनातन पर प्रहार किया जा रहा है. अनंत श्याम देवाचार्य ने भी योगी से सबूत मांगने को गलत बताया. वहीं योगी सरकार के मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने पलटवार करते हुए कहा कि क्या शंकराचार्य सभी हिंदुओं के ठेकेदार हैं.

यह विवाद अब केवल धार्मिक नहीं बल्कि पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है. एक तरफ शंकराचार्य इसे सनातन धर्म की रक्षा की लड़ाई बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ सरकार और उसके समर्थक इसे अनावश्यक टकराव मान रहे हैं. आने वाले दिनों में लखनऊ की धर्म संसद इस मुद्दे को और गर्म कर सकती है.