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पंकज चौधरी आज संभालेंगे यूपी BJP अध्यक्ष की कमान, टूटा 45 साल का रिकॉर्ड; कुर्मी समुदाय के नेता क्या भेद पाएंगे 2027 का चुनाव?

उत्तर प्रदेश बीजेपी को नया प्रदेश अध्यक्ष मिलने जा रहा है. पंकज चौधरी के नाम की घोषणा के साथ ही वे पिछले 45 सालों में पार्टी की कमान संभालने वाले चौथे कुर्मी नेता बनेंगे. यह फैसला बीजेपी के बदलते सामाजिक संतुलन और ओबीसी नेतृत्व के बढ़ते प्रभाव को दिखाता है.

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Babli Rautela

लखनऊ: उत्तर प्रदेश बीजेपी संगठन में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. पंकज चौधरी का नाम प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर तय माना जा रहा है और रविवार को इसकी औपचारिक घोषणा होने की संभावना है. इसके साथ ही वे पिछले 45 सालों में पार्टी की कमान संभालने वाले चौथे कुर्मी नेता बन जाएंगे. यह नियुक्ति न केवल संगठनात्मक बदलाव है बल्कि आने वाले चुनावों को देखते हुए सामाजिक संतुलन साधने की रणनीति का हिस्सा भी मानी जा रही है.

पंकज चौधरी यूपी बीजेपी के 15वें प्रदेश अध्यक्ष होंगे. हालांकि यह सत्रहवां कार्यकाल होगा क्योंकि कलराज मिश्रा ऐसे एकमात्र नेता रहे हैं जिन्हें लगातार तीन बार इस पद की जिम्मेदारी मिली थी. यह तथ्य पार्टी के इतिहास में खास माना जाता है. नए अध्यक्ष के रूप में पंकज चौधरी के सामने संगठन को मजबूत रखने और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ने की चुनौती रहेगी.

ब्राह्मण नेतृत्व का लंबा दौर

यूपी बीजेपी के संगठनात्मक ढांचे पर लंबे समय तक ब्राह्मण नेताओं का दबदबा रहा है. 1980 में पहले प्रदेश अध्यक्ष माधव प्रसाद त्रिपाठी बने थे. इसके बाद कई दशकों तक पार्टी की कमान इसी समुदाय के नेताओं के हाथ में रही. जुलाई 2019 तक डॉ महेंद्र नाथ पांडे के कार्यकाल तक ब्राह्मण नेतृत्व का प्रभाव साफ दिखता रहा. इस दौरान कुल छह ब्राह्मण नेताओं ने प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाई.

कलराज मिश्रा का नाम यूपी बीजेपी के इतिहास में खास तौर पर दर्ज है. वे 1992 से 1996 के बीच तीन बार प्रदेश अध्यक्ष चुने गए. पार्टी के भीतर यह एक अनोखा रिकॉर्ड है क्योंकि किसी और नेता को एक से ज्यादा बार यह जिम्मेदारी नहीं मिली. उनके अलावा केशरी नाथ त्रिपाठी रमापति त्रिपाठी और लक्ष्मीकांत बाजपेयी भी ब्राह्मण समुदाय से आने वाले प्रमुख अध्यक्ष रहे.

ओबीसी उभार और बदली रणनीति

2014 के बाद यूपी की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला. अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं का झुकाव बीजेपी की ओर बढ़ा. इसका असर लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत के रूप में सामने आया. 2017 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी को भारी बहुमत मिला. इसके बाद से संगठन में ओबीसी नेताओं को ज्यादा अहमियत मिलने लगी. पंकज चौधरी की नियुक्ति इसी बदली रणनीति का विस्तार मानी जा रही है.

कुर्मी समुदाय उत्तर प्रदेश की राजनीति में यादवों के बाद सबसे प्रभावशाली माना जाता है. यह समुदाय पूरे राज्य में फैला है लेकिन पूर्वी और मध्य यूपी में इसकी पकड़ ज्यादा मजबूत है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पद पर अब तक कुर्मी समुदाय के तीन नेता रह चुके हैं. 2000 में ओम प्रकाश सिंह पहले कुर्मी अध्यक्ष बने. इसके बाद 2004 में विनय कटियार और 2019 में स्वतंत्र देव सिंह को यह जिम्मेदारी मिली. अब पंकज चौधरी चौथे कुर्मी नेता होंगे जो पार्टी की कमान संभालेंगे.