menu-icon
India Daily

69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में फिर जगी उम्मीद, सुप्रीम कोर्ट की अंतिम सुनवाई पर टिकी अभ्यर्थियों की नजर

उत्तर प्रदेश की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण से प्रभावित अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट की प्रस्तावित अंतिम सुनवाई से पहले बैठक कर रणनीति बनाई है. अभ्यर्थियों की मांग है कि मूल चयन सूची के आधार पर प्रभावित याचियों को नियमों के अनुसार लाभ दिया जाए और वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों को हटाए बिना समाधान निकाला जाए.

babli
Edited By: Babli Rautela
69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में फिर जगी उम्मीद, सुप्रीम कोर्ट की अंतिम सुनवाई पर टिकी अभ्यर्थियों की नजर
Courtesy: AI

उत्तर प्रदेश की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती का मामला एक बार फिर चर्चा में है. परिषदीय विद्यालयों में हुई इस भर्ती में आरक्षण से प्रभावित अभ्यर्थियों की निगाहें अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अंतिम सुनवाई पर टिक गई हैं. इसी को लेकर रविवार को अभ्यर्थियों ने बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा की. गाजियाबाद के शालीमार गार्डन पार्क में पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा की ओर से आयोजित बैठक में प्रदेश के अलग अलग जिलों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी पहुंचे. बैठक की अध्यक्षता मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कश्यप ने की. अभ्यर्थियों ने कहा कि वे पिछले छह वर्षों से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं और अब उन्हें सुप्रीम कोर्ट से समाधान की उम्मीद है.

अंतिम सुनवाई से पहले बनाई रणनीति

बैठक में सुप्रीम कोर्ट में आठ से 10 सितंबर के बीच प्रस्तावित अंतिम सुनवाई को लेकर चर्चा हुई. अभ्यर्थियों ने कहा कि लंबे समय से चल रहे इस मामले में किसी भी याची अभ्यर्थी का नुकसान नहीं होना चाहिए. मोर्चे ने फैसला लिया कि अदालत में प्रभावित अभ्यर्थियों के पक्ष को मजबूती से रखने की कोशिश की जाएगी. इसके साथ ही सरकार से भी मामले का ऐसा समाधान निकालने की मांग की गई है, जिससे पहले से कार्यरत शिक्षकों पर प्रतिकूल असर न पड़े.

हाई कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कश्यप ने बैठक में कहा कि लखनऊ हाई कोर्ट की डबल बेंच ने 13 अगस्त 2024 को 69 हजार शिक्षक भर्ती की पूरी सूची को निरस्त कर दिया था. मोर्चे के अनुसार भर्ती में करीब 19 हजार सीटों पर आरक्षण से जुड़ी अनियमितता का आरोप है. अभ्यर्थियों का कहना है कि इस मामले में प्रभावित उम्मीदवारों को नियमों के अनुसार उनका अधिकार मिलना चाहिए. हालांकि भर्ती को लेकर कानूनी प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है और अंतिम स्थिति सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी.

मूल चयन सूची पेश करने की मांग

अभ्यर्थियों के संगठन ने सरकार से मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मूल चयन सूची प्रस्तुत की जाए. उनका कहना है कि आरक्षण नियमों के आधार पर प्रभावित याचियों को याची लाभ दिया जाना चाहिए. मोर्चे ने यह भी कहा है कि वर्तमान में जिन शिक्षकों की नियुक्ति हो चुकी है और जो अपने पद पर काम कर रहे हैं, उन्हें हटाए बिना मामले का समाधान निकाला जाना चाहिए. अभ्यर्थियों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी अन्य शिक्षक का नुकसान करना नहीं बल्कि आरक्षण से प्रभावित उम्मीदवारों को उनके अधिकार के अनुसार राहत दिलाना है.

बैठक में बताया गया कि मामले को लेकर सरकार और भाजपा नेताओं को पत्र भेजे गए हैं. अभ्यर्थी लगातार अपनी मांगों को शासन और राजनीतिक स्तर पर भी उठा रहे हैं. मोर्चा के प्रवक्ता नितिन पाल और बीपी डिसूजा ने भी मामले को लेकर संगठन की स्थिति स्पष्ट की. वहीं मीडिया प्रभारी राजेश चौधरी ने कहा कि इस मामले में बीएड का मुद्दा नहीं है. अभ्यर्थियों का जोर आरक्षण से जुड़े विवाद और याची लाभ की मांग पर है.