मथुरा: जांच में आरोप झूठे पाए जाने पर निलंबित प्रधान अध्यापक सवेतन बहाल, BSA की कार्रवाई पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में अब बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) रतन कीर्ति की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं, जिन्होंने बिना प्राथमिक जांच के एक दिन के भीतर प्रधान अध्यापक को निलंबित कर दिया था.
मथुरा के नौहझील विकासखंड स्थित प्राथमिक विद्यालय के प्रधान अध्यापक जान मोहम्मद को आखिरकार राहत मिल गई है. भाजपा नेता की शिकायत पर निलंबित किए गए प्रधान अध्यापक को दो सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के बाद सवेतन बहाल कर दिया गया है. जांच में स्कूल में नमाज कराने, धर्मांतरण के लिए प्रेरित करने और राष्ट्रगान न कराने जैसे सभी आरोप पूरी तरह झूठे और असत्य पाए गए हैं.
इस पूरे मामले में अब बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) रतन कीर्ति की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं, जिन्होंने बिना प्राथमिक जांच के एक दिन के भीतर प्रधान अध्यापक को निलंबित कर दिया था.
दो सदस्यीय टीम ने की गहन जांच
बेसिक शिक्षा अधिकारी रतन कीर्ति ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दो सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था. जांच समिति में खंड शिक्षा अधिकारी मांट और छाता को शामिल किया गया. पहले समिति को एक माह में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन मामला तूल पकड़ने के बाद तीन दिन में जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया.
शुक्रवार को जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट BSA को सौंप दी. रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया कि प्रधान अध्यापक जान मोहम्मद के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप निराधार, असत्य और द्वेषपूर्ण हैं.
ग्राउंड जीरो पर भी फेल हुए आरोप
जांच समिति ने न केवल कागजी रिकॉर्ड की जांच की, बल्कि स्कूल पहुंचकर भौतिक सत्यापन भी किया. समिति ने छात्रों, शिक्षकों और ग्रामीणों से बातचीत की. जांच में सामने आया कि स्कूल में कुल 8 शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें से 7 हिंदू हैं. वहीं 235 छात्रों में से केवल 89 छात्र मुस्लिम समुदाय से हैं.
छात्रों, अभिभावकों और ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से आरोपों को बेबुनियाद बताया. किसी भी छात्र, शिक्षक या ग्रामीण ने नमाज, धर्मांतरण या राष्ट्रगान न होने की पुष्टि नहीं की. जांच में प्रधान अध्यापक के खिलाफ एक भी ठोस सबूत या गवाह नहीं मिला.
30 जनवरी को शुरू हुआ था विवाद
पूरा मामला 30 जनवरी का है, जब भाजपा के बाजना मंडल अध्यक्ष दुर्गेश प्रधान ने बेसिक शिक्षा अधिकारी को एक शिकायत पत्र सौंपा था. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि प्रधान अध्यापक जान मोहम्मद बच्चों से नमाज पढ़वाते हैं, उन्हें इस्लाम धर्म अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं और स्कूल में राष्ट्रगान नहीं कराते.
शिकायत के आधार पर BSA रतन कीर्ति ने बिना किसी प्रारंभिक जांच के 31 जनवरी को जान मोहम्मद को पदकीय दायित्वों में लापरवाही का दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया था. इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया था.
6 फरवरी को सवेतन बहाली का आदेश
जांच रिपोर्ट आने के बाद 6 फरवरी को BSA ने आधिकारिक आदेश जारी करते हुए प्रधान अध्यापक जान मोहम्मद को निलंबन की तारीख से सवेतन बहाल कर दिया. इसका मतलब है कि निलंबन अवधि के दौरान का पूरा वेतन और भत्ते उन्हें मिलेंगे. विभागीय नियमों के तहत अब उन्हें ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से विद्यालय आवंटित किया जाएगा.
BSA की कार्यशैली पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं. इतने संवेदनशील और गंभीर आरोपों में क्या बिना जांच के निलंबन उचित था? ग्रामीणों का आरोप है कि जब वे BSA से मिलने पहुंचे तो उनका रवैया बेहद आक्रामक रहा. इस दौरान एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें BSA ग्रामीणों पर गुस्सा निकालती नजर आई थीं.
अब जब जांच में आरोप पूरी तरह झूठे साबित हो चुके हैं, तो यह मामला सियासी रंजिश, गलतफहमी या जल्दबाजी में की गई प्रशासनिक कार्रवाई का उदाहरण बनकर सामने आया है.