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बरसाना में लट्ठमार होली के दौरान मची भगदड़, कई श्रद्धालु दबे; पुलिस की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा

मथुरा के बरसाना में लट्ठमार होली के दौरान बाग मोहल्ला बैरियर पर भारी भीड़ बेकाबू हो गई. मची भगदड़ में कई श्रद्धालु गिरकर दब गए, जिन्हें पुलिस और स्थानीय युवाओं ने समय रहते सुरक्षित बचा लिया.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
बरसाना में लट्ठमार होली के दौरान मची भगदड़, कई श्रद्धालु दबे; पुलिस की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा
Courtesy: x

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित बरसाना की विश्व प्रसिद्ध लट्ठमार होली के दौरान बुधवार को एक रोंगटे खड़े कर देने वाला दृश्य सामने आया. राधारानी मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब इस कदर उमड़ा कि व्यवस्थाएं ताश के पत्तों की तरह बिखरती नजर आईं. बाग मोहल्ला बैरियर पर जमा हजारों लोगों की भीड़ अचानक अनियंत्रित हो गई, जिससे वहां भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई. पुलिस प्रशासन और स्थानीय लोगों की सूझबूझ से एक बड़ी जनहानि होने से टल गई.

मंदिर जाने की होड़ और बैरियर का दबाव दोपहर के दो बज रहे थे और लट्ठमार होली का उत्साह अपने चरम पर था. राधारानी मंदिर के पट बंद होने के कारण पुलिस ने पुराने बस अड्डे से बाग मोहल्ला जाने वाली भीड़ को बैरियर लगाकर रोक दिया था. इसी बीच बरसाना और नंदगांव के हुरियारे दर्शन के लिए मंदिर पहुंच गए. मंदिर परिसर में हुरियारों की मौजूदगी के कारण आम श्रद्धालुओं को काफी देर तक इंतजार करना पड़ा. मंदिर पहुंचने की व्याकुलता और पीछे से बढ़ते दबाव ने बैरियर पर तैनात पुलिसकर्मियों की मुश्किलें बढ़ा दीं.

भगदड़ का वो खौफनाक मंजर भीड़ का दबाव इतना बढ़ा कि लोग बैरियर तोड़कर आगे निकलने की कोशिश करने लगे. पुलिसकर्मियों ने लाउडस्पीकर और व्यक्तिगत स्तर पर लोगों को समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन श्रद्धा और जल्दबाजी के आगे प्रशासन बेबस नजर आया. स्थिति को हाथ से निकलता देख पुलिस को मजबूरन बैरियर खोलना पड़ा. जैसे ही रास्ता खुला, बेकाबू भीड़ मंदिर की ओर बेतरतीब तरीके से दौड़ पड़ी. इस अफरा-तफरी में संतुलन बिगड़ने के कारण दर्जनों श्रद्धालु एक-दूसरे के ऊपर गिर गए और वहां कोहराम मच गया.

देवदूत बनकर आए पुलिसकर्मी और युवा जमीन पर गिरे श्रद्धालुओं के ऊपर से जब भीड़ गुजरने लगी, तो पुलिसकर्मियों ने अदम्य साहस का परिचय दिया. जवानों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए दौड़ती भीड़ के सामने दीवार बनाकर घेरा खड़ा कर दिया. उनके साथ स्थानीय युवाओं ने भी बचाव कार्य में मोर्चा संभाला. भीड़ के पैरों के नीचे दबे लोगों को बड़ी मशक्कत से खींचकर बाहर निकाला गया और सुरक्षित स्थान पर बिठाया गया. पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने एक विनाशकारी भगदड़ को बड़ी त्रासदी में बदलने से रोक लिया.

सुरक्षा इंतजामों पर उठते गंभीर सवाल हादसे के बाद चश्मदीदों का कहना था कि यदि उस समय बुजुर्ग या महिलाएं गिर जातीं, तो परिणाम भयावह हो सकते थे. बाग मोहल्ला बैरियर एक ऐसा संवेदनशील स्थान है जहां हर साल होली पर भीड़ का दबाव सबसे अधिक होता है. पिछले वर्ष भी इसी स्थान पर लगभग ऐसी ही दुर्घटना होते-होते बची थी. बार-बार एक ही स्थान पर अव्यवस्था होना यह दर्शाता है कि प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने पिछली घटनाओं से कोई ठोस सबक नहीं लिया है, जिससे श्रद्धालुओं में नाराजगी है.

पुराने हादसों की कड़वी यादें बरसाना में सुरक्षा की यह चूक नई नहीं है. ठीक दो साल पहले लड्डूमार होली के दौरान भी राजभोग दर्शन के समय ऐसी ही अफरा-तफरी मची थी. उस वक्त भीड़ के दबाव से मंदिर के निकास द्वार की लोहे की रेलिंग तक टूट गई थी. उस हादसे में कई श्रद्धालु गश खाकर गिर गए थे और कइयों की हालत बेहद गंभीर हो गई थी. स्थानीय लोगों का मानना है कि जब तक मंदिर क्षेत्र में भीड़ प्रबंधन के आधुनिक तरीके नहीं अपनाए जाएंगे, तब तक श्रद्धालुओं की जान जोखिम में बनी रहेगी.

 

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